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इटावा का 'इमदादखानी घराना' शास्त्रीय संगीत में पूरे भारत बिखेर रहा अपनी खुशबू

इटावा का 'इमदादखानी घराना' शास्त्रीय संगीत में पूरे भारत बिखेर रहा  अपनी खुशबू

इटावा फाउंडेशन के सौजन्य 14 नवंबर को एक शाम इटावा घराने के नाम

इटावा।।इटावा फाउंडेशन के सौजन्य से 14 नवंबर शाम 8:00 बजे से 9:30 बजे तक फेसबुक पर शास्त्रीय संगीत के इटावा घराने की प्रस्तुति का आनंद लें। इटावा फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ विश्वपती त्रिवेदी के अथक प्रयासों से इंडियन क्लासिकल म्यूजिक सर्कल की सहायता से इटावा घराने की प्रस्तुति कार्यक्रम सुनिश्चित किया जा चुका है। डॉ विश्वपती त्रिवेदी ने  बताया इटावा के गौरवशाली शास्त्रीय संगीत घराने की स्वर्णिम यादों को सजोने का कार्य और इस प्रस्तुति के माध्यम से लोगों को जोड़ने की पूरी कोशिश की गई है,जो अपने आप में इटावा के गौरवशाली इतिहास को जनमानस तक पहुंचाने की पहल है।
इस प्रस्तुति का आनंद लेने के लिए फेसबुक पर जाकर लिंक पर https:/www.facebook.com/Indianclassicalmusiccircle/videos/90881832995052अलाउड टू पेज करें लिंक 14 नवंबर शाम 8:00 बजे एक्टिवेट होगा।

शास्त्रीय संगीत में इटावा घराने का अद्वितीय योगदान
इटावा फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ विश्वपति त्रिवेदी (पूर्व आईएएस) ने विस्तारपूर्वक इटावा घराने के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि जनपद इटावा संगीत के क्षेत्र में विशेष स्थान रखता है। इमदादखानी घराना भारत के प्रमुख संगीत घरानों में गिना जाता है।इस घराने का उद् भव  इटावा में ही हुआ। इमदाद खानी घराना उस्ताद इमदाद खान के नाम से भी जाना जाता है। यह घराना अपने अद्वितीय संगीत परिचय के लिए पूरे भारतवर्ष में जनपद इटावा को गौरवान्वित कर रहा है। यह बात बहुत ही हर्ष की है, यह संगीत घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत के सबसे पुराने घरानों में से एक है । यह घराना अपनी प्रत्येक पीढ़ी दर पीढ़ी के माध्यम से शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में बड़े-बड़े नामों से विख्यात हुआ है। सम्राट अकबर के दरबार के प्रसिद्ध सम्मानित संगीतकारों में इस घराने के ठाकुर सज्जन सिंह जी दिल्ली में मुगल दरबार में समय-समय पर शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया  जाता था। बाद में उनके बेटे तूरब खान  जिन्हें पहले  बहादुर सिंह के नाम से जाना जाता था। और बेटा सहबद खान जिन्हें पहले साहब सिंह के नाम से जाना जाता था, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के बहुत ही उत्कृष्ट कलाकार थे।
सहबद खान ग्वालियर घराने के महान गायक उस्ताद हददु खान के बहनोई थे और उनसे मुखर संगीत सीख पारंगत हुए। सहबद खान उर्फ साहिब सिंह ने अपने संगीत को मुखर संगीत जलतरंग और सारंगी पर लागू किया बाद में उन्होंने सितार बजाना शुरू कर दिया और वह सुरबहार के गुरु थे।  इमदाद खान का परिवार भारत के प्रसिद्ध संगीत परिवारों में से एक है जिनकी जड़ें  इटावा में ही थीं, बाद में हैदराबाद, इंदौर, मुंबई, कोलकाता में इन जड़ों का विस्तार हुआ। वाहिद खान विलायत खान इमरत खान जो उस्ताद इमदाद खान के पुत्र थे और उस्ताद इनायत खान के बेटे और यहां याद रखने की बात है इमदाद खान इटावा के थे। इमदाद खान के वंशज  आज दुनिया भर में भारत के संगीतकारों का नेतृत्व कर रहे हैं, और अपनी पहचान से हजारों  प्रशंसकों के दिलों में जगह बनाए हैं। इमदाद खान वंशज विलायत खान आधुनिक सितार के वास्तुकार माने जाते हैं। भारत के शास्त्रीय  वाध  संगीत पर उन्होंने  अपार क्रांतिकारी चिरस्थायी छाप छोड़ी है। शाहिद परवेज निधत खान शुजात खान इरशाद खान बुधादित्य मुखर्जी को वैश्विक पुनरावृति के साथ सबसे महत्वपूर्ण सितार प्रतिपादक माना गया है, यह सभी कहीं ना कहीं इटावा शास्त्रीय संगीत इमदाद खानी घराने से ही ताल्लुक रखते हैं।

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