*बिधूना विधानसभा क्षेत्र में चुनाव को लेकर संभावित दावेदारों की सरगर्मी हुई तेज*
*जन्मदिन के बहाने तो कहीं विकलांगों को उपकरण दिलाने के नाम पर लोगों को जा रहा लुभाया*
*बिधूना,औरैया।* विधानसभा चुनाव सन्निकट मानकर बिधूना विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक दलों के संभावित दावेदारों की गतिविधियां तेज होने के साथ मतदाताओं को कहीं कंबल वितरण शिविर तो कहीं विकलांग पंजीकरण शिविर के माध्यम से तरह-तरह से लुभाने के प्रयास भी जोर पकडते नजर आ रहे हैं , वहीं इस मामले में सपा ,भाजपा फिलहाल सबसे आगे दिख रही है , लेकिन फिलहाल क्षेत्रीय मतदाताओं की बेरुखी से संभावित दावेदारों की चिंताएं अभी बढी नजर आ रही है।
भले ही अभी विधानसभा चुनाव दूर है, लेकिन बिधूना विधानसभा क्षेत्र के संभावित दावेदारों की सरगर्मियां अभी से काफी तेज हो गई हैं। आलम यह है कि जहां राजनीतिक दलों के नेताओं की जगह-जगह कार्यकर्ता बैठकों का दौर शुरू हो गया है वही अधिकांश संभावित दावेदार जो पहले ब्रह्म की तरह अंतर्ध्यान रहते थे। वह इस समय क्षेत्रीय मतदाताओं के सुख-दुख के कार्यक्रमों में भी प्राण प्रण से शिरकत करते देखे जा रहे हैं। इतना ही नहीं इस विधानसभा क्षेत्र में सपा से संभावित दावेदारों में बिधूना विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय गजेंद्र सिंह की पुत्र वधू रचना सिंह , पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धनीराम वर्मा के पुत्र दिनेश वर्मा गुड्डू , सुशील वर्मा एडवोकेट पूर्व विधायक स्वर्गीय महेश वर्मा की धर्मपत्नी पूर्व ब्लाक प्रमुख रेखा वर्मा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के प्रयासों में लगे दिख रहे हैं। जबकि भाजपा से मौजूदा भाजपा विधायक विनय शाक्य के अनुज देवेश शाक्य बिल्लू , मंजू सिंह सेंगर ,पूर्व राज्य मंत्री सतीश पाल संभावित दावेदारों की कतार में है। वही कांग्रेस से मन मोहन सिंह सेंगर , नसीम खाँन , बसपा से गौरव रघुवंशी , प्रसपा से पूर्व विधायक प्रमोद कुमार गुप्ता एलएस , जनसत्ता दल से क्षेत्रपाल सिंह तोमर , आम आदमी पार्टी से पिंटू शर्मा के साथ ही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपू सिंह राजावत भी इस क्षेत्र से संभावित दावेदारों में माने जा रहे हैं।
वैसे तो इन सभी संभावित दावेदारों द्वारा क्षेत्र में कार्यकर्ता बैठकों के साथ ही गांव गांव मतदाताओं से जनसंपर्क अभियान भी तेज कर दिया गया है। संभावित दावेदारों द्वारा कहीं जन्मदिवस के नाम पर तो कहीं कंबल वितरण शिविर लगाकर क्षेत्रीय लोगों को कंबल बांटकर तो कहीं विकलांगों को उपकरण दिलाने के नाम पर पंजीकरण शिविर लगाकर लुभाने पटाने का भरसक प्रयास किया जाता नजर आ रहा है लेकिन इस क्षेत्र के जागरूक मतदाता इस बार इन नेताओं के लुभावने सब्जबाग व प्रलोभनों के झांसे में फिलहाल फंसते नहीं दिख रहे हैं। पिछले चुनावों में झूठे वादों के झांसे में आकर अपने को ठगा महसूस कर चुके मतदाता इस बार किसी संभावित दावेदार को कोई पक्का भरोसा फिलहाल न देकर सोच समझकर इस बार मतदान करने की मंशा बनाए दिख रहे हैं जिससे राजनीतिक दलों के संभावित दावेदारों की चिंताएं अभी काफी बढी नजर आ रही है।
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