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जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते सरकारी योजनाएं तोड़ रही दम

*जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते सरकारी योजनाएं तोड़ रही दम* 

*बिधूना,औरैया।* प्रदेश की भाजपा सरकार में किस तरह से शासन की योजनाएं दम तोड़ रही हैं। इसका एक जीता जागता प्रमाण तहसील क्षेत्र के ग्राम मल्हौसी में स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। तहसील क्षेत्र के ग्राम मल्हौसी में 7 जुलाई 2020 को मदरसा एबीएसएच वारसी मिनी आईटीआई की स्थापना की गई थी। जिसके प्रबंधन के लिये प्रबंधक की जिम्मेदारी सैयद शेख हसन  को दी गयी है। मिनी आईटीआई में फिटर वाइरलैस, गैस एंव विद्युत वैल्डर जैसी महत्वपूर्ण ट्रेडें है , जबकि  व्याख्यान कक्ष लैब आदि के अलावा प्रशासनिक कक्ष भी है। व्याख्यान कक्ष की स्थिति यह है , कि उसमें गड्ढे बन गये है। ऐसा लगता है जैसे महीनों से किसी व्यक्ति ने उसमें प्रवेश न किया हो। लैब में महीनों से प्रबंधक द्वारा ताला बंदी की गयी है। जिसमें मौजूद उपकरण धूल फाँक रहे हैं।  प्रशिक्षुओं के नाम पर समीर, अख्तर, अभिषेक, सचिन कुमार, मोहम्मद आजाद, दिलशाद, इमरान मोहम्मद ,उमेश, फुरकान आदि के नाम पंजीकृत है। जबकि एक भी प्रशिक्षु प्रशिक्षण लेने नहीं आ रहा है| लैब में तालाबंदी और अवस्थाओं के बावजूद भी मिनी आईटीआई के कर्मठ कार्मिक  मुख्य अनुदेशक  के रूप में कार्यरत संजय त्रिवेदी, सत्यवीर शाह, रामकिशन शर्मा ,अनुदेशिका संगीता प्रतिदिन आकर  बैठते हैं और समय समाप्त होने पर वापस चले जाते हैं। मुख्य अनुदेशक संजय त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने प्रबंधक से कई बार लैब खोलने के साथ  मिनी आईटीआई का विधिवत संचालन कराने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने एक न सुनी| उन्होंने कहा कि जुलाई से मार्च तक और बीते 3 महीनों का उनका  बकाया वेतन नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मिनी आई टीआई की व्यवस्थाओं को सुधारने के साथ उसके नियमित संचालन का उन्होंने कई बार उच्च अधिकारियों से लिखित  अनुरोध भी किया लेकिन हालात जस के तस बने हुऐ हैं। मिनी आईटीआई में अव्यवस्थाओं का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मिनी आईटीआई में आज तक विद्युतीकरण नहीं कराया गया है जबकि कई महत्वपूर्ण ट्रेडें अनुमन्य हैं। इस सम्बन में जब  प्रभारी विकलाँग कल्याण अधिकारी डाक्टर प्रीतीलता से फोन से सम्पर्क करना चाहा तो उनका फोन नोट रीचेविल मिला।

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