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उर्वशी दीक्षित राष्ट्रीय पुरस्कार “फ्लोरेंस नाइटेंगल” से सम्मानित डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल की सहायक नर्सिंग अधीक्षका उर्वशी ने बढ़ाया जिले का मान

उर्वशी दीक्षित राष्ट्रीय पुरस्कार “फ्लोरेंस नाइटेंगल” से सम्मानित 
डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल की सहायक नर्सिंग अधीक्षका  उर्वशी ने बढ़ाया जिले का मान 
इटावा।।डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल की  सहायक नर्सिंग अधीक्षिका उर्वशी दीक्षित ने एक बार फिर जनपद वासियों का मान बढ़ाया है | उर्वशी को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए  राष्ट्रीय पुरस्कार फ्लोरेंस नाइटेंगल से  सम्मानित किया गया है  । 
 योजना  भवन - लखनऊ में बुधवार की शाम आयोजित कार्यक्रम में  राष्ट्रपति  रामनाथ कोविंद  ने उर्वशी दीक्षित को यह पुरस्कार वर्चुअल माध्यम से प्रदान किया | हाल ही में उन्हें मिशन शक्ति के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा  स्वास्थ्य सेवा में  उत्कृष्ट कार्य के लिए भी सम्मानित किया गया है ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भगवान दास ने कहा - उर्वशी    के निर्देशन में  स्वास्थ्य कर्मी अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बना सकते हैं। हम उनकी इस उपलब्धि के लिए  ढेरों शुभकामनाएं व बधाई देते हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति डॉ. रमाकांत यादव ने कहा -   सैफई विश्वविद्यालय की ओर से मैं उनको राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देता हूं और आशा करता हूँ कि सभी स्वास्थ्य कर्मी उनसे प्रेरणा लेकर अपनी बेहतर सेवायें  देते रहेंगे।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एम.एम. आर्य ने कहा उर्वशी  हमारे अस्पताल की शान हैं , उनकी कार्यशैली सदैव उत्कृष्ट रही है। उनको मिली उपलब्धि के लिए  हृदय से बधाई देता हूं। उन्होंने बताया कि पूरे उत्तर प्रदेश में  केवल उर्वशी   को ही इस अवार्ड के लिए चयनित किया गया। यह हम सबके लिए बहुत ही हर्ष की बात है।
सहायक नर्सिंग अधीक्षक उर्वशी दीक्षित ने इस अवसर पर कहा - सर्वप्रथम मैं उस ईश्वर का धन्यवाद देती हूं जिन्होंने मुझे यह पल दिया। अपने सभी चिकित्सकों  व स्टॉफ का धन्यवाद करती हूँ  जिन्होंने मुझे हमेशा प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि मेरे पिताजी  राधे श्याम दीक्षित ने जब मुझे नर्सिंग इंस्टीट्यूट कानपुर में ट्रेनिंग के लिए  भेजा था तब उन्हें बहुत विरोध का सामना करना पड़ा।  उसके बाद भी मेरे पिता जी ने मेरा साथ दिया,और आज मैं जो भी हूँ  वह उनकी वजह से हूँ । उन्होंने कहा यदि मेरे पिताजी मुझे उस समय पढ़ने का अवसर न देते,तो मुझे आज यह  अवसर नहीं मिलता। इसलिए मैं हर माता-पिता से कहना चाहती हूँ कि  अपनी बच्चियों को आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रोत्साहित करें, जिससे उन्हें सफलता के कई अवसर मिलें।

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