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🌼भारत की गौरव गाथा,🌼

🌼भारत की गौरव गाथा,🌼

चरणों को धोता सागर है,
सिर मौर हिमालय है जिसका,
पूरब - पश्चिम जिसकी बाहें,
गुणगान करूं मैं क्या उसका।
गंगा, यमुना और सरस्वती,
जो नदियां यहां की माता हैं,
शेषनाग के फन पर चढ़कर,
कान्हा उसको नचाता है।
सावित्री देवी के आगे,
आकर यमराज भी हारा है।
वो भारत देश हमारा है।-2

एक भरत नाम का लाल हुआ,
जो तनिक भी न बेहाल हुआ,
अब काल उसे क्या ही मारे,
जो दांत सिंह के गिन डाले,
एकलव्य के जैसे शिष्य यहां,
अंगुष्ठ काट दे देते हैं,
हैं महादेव से देव यहां,
लट में सुरसरि भर लेते हैं,
एक नारी अहल्या थी जिसको,
पग से प्रभु राम ने तारा है,
वो भारत देश हमारा है। -2

काश्मीर का केसर है,
गोवा का मनोरम बीच भी है,
अस्थियां दान में दे डालीं,
यहां ऐसे मुनि दधीचि भी हैं।
 है हरिश्चंद्र का त्याग यहां
मीराबाई सी भक्ति है,
भस्मासुर जलकर राख हुआ,
मैया दुर्गा की शक्ति है,
ईसाई, सिख, हिंदू,मुस्लिम,
आपस में भाई चारा है,
वो भारत देश हमारा है-2

राजगुरु, सुखदेव, भगतसिंह,
हंसकर फांसी झूल गए,
भारत माता की रक्षा में,
जीवन क्या है ये भूल गए।
कल्पना चावला और सुनीता,
अंतरिक्ष तक जाती हैं,
लक्ष्मीबाई तन्हा झांसी में,
गोरों से लड़ जाती हैं।।
उद्यम सिंह जिसने डायर को,
लंदन में जाकर मारा है।
वो भारत देश हमारा है -2
उपासना राजपूत 🖊️
अध्यापिका, औरैया

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