उत्तर प्रदेश न्यूज 21/ऑल इंडिया प्रेस एसोशियशन
"स्तनपान विकल्प, नहीं संकल्प है"
विश्व स्तनपान सप्ताह पर आंगनबाड़ियों ने स्तनपान के प्रति धात्री महिलाओं को किया जागरूक
इटावा।जनपद में सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है, लेकिन कोविड प्रोटोकॉल के तहत कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हो पा रहा है।इसलिए आंगनवाड़ी अपने क्षेत्र पर घर घर जाकर धात्री महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया यह कहना है सीडीपीओ उत्तम कुमार का उन्होंने बताया सभी आंगनबाड़ी अपने क्षेत्र में जाकर धात्री महिलाओं को पौष्टिक खानपान और बच्चे को सही तरीके से स्तनपान कराने के विषय में गृह भ्रमण कर विस्तार पूर्वक जानकारियां दे रही हैं।
नगरीय क्षेत्र (इटावा)की मुख्य सेविका अंजू राठौर ने कहा मैं अपने निर्देशन में समय समय पर सभी आंगनबाड़ियों से समन्वय स्थापित कर स्तनपान जागरूकता के लिए सभी आंगनवाड़ी को प्रेरित कर रही हूं। सभी आंगनबाड़ियों अपने अपने क्षेत्र में जाकर मेरे दिए हुए निर्देश के अनुसार कार्य कर रही है।
आंगनवाड़ी ने समझाया "स्तनपान विकल्प नहीं संकल्प है"
नगरीय क्षेत्र सराय शेख की आंगनवाड़ी साधना गुप्ता ने अपने क्षेत्र पर भ्रमण कर धात्री दिव्यांशी,स्वेतलाना ,सीमा,निखत,नगमा आदि महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया। आंगनवाड़ी साधना ने धात्री महिलाओं को बताया स्तनपान कोई विकल्प नहीं है,यह एक संकल्प की तरह है। स्तनपान कराने से शिशु का सर्वोत्तम विकास होता है। शिशु स्वस्थ और प्रसन्न रहता है। उन्होंने बताया स्तनपान कराने से पहले साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने धात्री महिलाओं को स्तनपान के निम्न लाभ बताए-
नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा (कोलेस्ट्रम) चिपचिपा युक्त दूध सर्वोत्तम आहार होता है। जो उसे कई बीमारियों से स बचाता है।
6माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराएं इसके अतिरिक्त कोई आहार व तरल न दें
मां के दूध से बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और वह बीमारियों से दूर रहता है।
स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्तन कैंसर जैसी बीमारियां नहीं होती।शिशु जब 6 माह का हो जाए तब उसे अर्ध तरल भोजन दें,लेकिन स्तनपान कराते रहें।स्तनपान कराने वाली महिलाएं खूब पानी पिएं व अपने आहार में तरल पदार्थों का सेवन करें।मां स्तनपान कराती है तो शिशु मानसिक रूप से संतुष्ट व स्वस्थ रहता है।
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