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दलदल से निकलने को बेबस लोग।
*नगरपालिका की अनदेखी बढ़ाती जा रही रहनवासियों की अटकलें*
रिपोर्ट सौरभ त्यागी जालौन
उरई (जालौन) - नगरपालिका में दलदल भरे रास्तों के बीच रहनवासियों के लिये समस्याओं का तांता है इतना ही नही असल कारण नाली का निकास व कच्चे रास्ते है यह समस्या जब और बढ़ जाती है जब बरसात का समय हो सुशील नगर , ऑफिस कालोनी के पीछे , जालौन वाई पास , नयी वस्ती , शिवा पैलेस , धर्मा पैलेस के पास के मुहल्ले बिना नाली , रास्ते से मुहल्ले के निवासी हताहत
परेशानियों के बीच गुजर रहे है इतना ही नही यदि देखा जाये तो ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी समस्याओं का होना आम बात बन चुकी है लेकिन जब ऐसी समस्याओं का जाल नगरपालिका में बिखरा होगा तो आने वाले दौर की तस्वीरें क्या होगी हालांकि तो वहीं एक बड़ी बात यह भी है कि नगरपालिका होने के साथ ही साथ यह जनपद का मुख्यालय भी है उच्चाधिकारी से लेकर सियासी गलियारे भी यहीं से आगे की ओर उन्मुक्त होते है तो वहीं रह रहे मुहल्ले के लोगों का कहना है कि नगरपालिका में हमने घर तो बना लिया पर यहाँ की असल तस्वीरों में कुछ और ही वयां होता है न ही पानी के निकास के लिये नाली बनायी गयी न ही रास्ते पक्के करवाये गये बरसात का जमा पानी जब इन रास्तों , गलियों व मुहल्ले मे इकट्ठा होता है तो चलना निकलना तो दूर जमा पानी बीमारियों का घर बन जाता है अब इस कीचड़ की समस्याओं को नगरपालिका किस प्रकार अमल में लायेगा यह तो आने वाले वक्त में ही तय किया जा सकता है फिलाल मुख्य बात यह भी है कि आँखे बन्द कर बैठी नगरपालिका इन मुहल्ले के निवासियों पर कितना गौर फरमाती है व रहवासियों के प्रति कितनी दिलचस्पी रहती है ये तो वक्त की तस्वीरें ही वयां कर पायेगी ?? ।
परेशानियों के बीच गुजर रहे है इतना ही नही यदि देखा जाये तो ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी समस्याओं का होना आम बात बन चुकी है लेकिन जब ऐसी समस्याओं का जाल नगरपालिका में बिखरा होगा तो आने वाले दौर की तस्वीरें क्या होगी हालांकि तो वहीं एक बड़ी बात यह भी है कि नगरपालिका होने के साथ ही साथ यह जनपद का मुख्यालय भी है उच्चाधिकारी से लेकर सियासी गलियारे भी यहीं से आगे की ओर उन्मुक्त होते है तो वहीं रह रहे मुहल्ले के लोगों का कहना है कि नगरपालिका में हमने घर तो बना लिया पर यहाँ की असल तस्वीरों में कुछ और ही वयां होता है न ही पानी के निकास के लिये नाली बनायी गयी न ही रास्ते पक्के करवाये गये बरसात का जमा पानी जब इन रास्तों , गलियों व मुहल्ले मे इकट्ठा होता है तो चलना निकलना तो दूर जमा पानी बीमारियों का घर बन जाता है अब इस कीचड़ की समस्याओं को नगरपालिका किस प्रकार अमल में लायेगा यह तो आने वाले वक्त में ही तय किया जा सकता है फिलाल मुख्य बात यह भी है कि आँखे बन्द कर बैठी नगरपालिका इन मुहल्ले के निवासियों पर कितना गौर फरमाती है व रहवासियों के प्रति कितनी दिलचस्पी रहती है ये तो वक्त की तस्वीरें ही वयां कर पायेगी ?? ।

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