"शिक्षाविद,समाजसेवी,साहित्यकार स्वर्गीय प्रकाश चंद त्रिपाठी राघव के असमय निधन पर विशेष"
*सदा के लिए सो गये साहित्य के सितारे "प्रकाश चंद त्रिपाठी 'राघव'--घनश्याम सिंह वरिष्ठ पत्रकार व त्रिभाषी साहित्यकार*
उप्र के जनपद औरैया के ग्राम पिपरौली शिव के प्रमुख साहित्यकार व शिक्षक स्वर्गीय गिरिजा किशोर त्रिपाठी "मयंक" के बेटे प्रकाश चंद त्रिपाठी 'राघव' प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर उरई के निधन का समाचार सुनकर अत्यंत हार्दिक कष्ट हुआ, प्रकाश चंद त्रिपाठी 'राघव' अत्यंत मिलनसार व्यक्ति थे, साहित्यकार होने के नाते उनसे मेरा अक्सर मिलना जुलना रहता था,स्व.प्रकाश चंद त्रिपाठी 'राघव' ने अपने पिता से विरासत में मिली साहित्य कला को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक मूल्यों के पुनरुत्थान व वर्तमान समय के परिवेश पर तमाम रचनाएं, लेख लिखे,उन्होंने पूर्व में आर एस एस के विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं और सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षण से लेकर प्रधानाचार्य पद का दायित्व संभाला, वे वर्तमान में सरस्वती शिशु मंदिर उरई के प्रधानाचार्य थे,इसके पूर्व भी वे छिबरामऊ, फर्रुखाबाद आदि कई स्थानों पर सरस्वती शिशु मंदिरों का पदभार सम्हाले रहे,प्रकाश चंद्र त्रिपाठी 'राघव' कितने मिलनसार व्यक्ति थे कि वे राह चलते परिचितों को पकड़ कर जबरन चाय,पानी,नाश्ता कराते थे और कुशलक्षेम पूछते थे वह यह नहीं देखते थे कि हमारे मित्र के साथ और कौन है अगर उनके साथ अपरिचित भी होते थे तो वह उनका भी स्वागत है उसी दृष्टि से करते थे, वे जब जब अपने पैतृक ग्राम पिपरौली आते थे तो हमें अवश्य याद करते थे जब हम उनके घर जाते थे तो अक्सर साहित्यक और सामाजिक चर्चाएं किया करते थे और हम से अक्सर इस बात पर चर्चा किया करते थे मुझे अपने पिताजी के नाम को आगे बढ़ाने के लिए उनके द्वारा स्थापित जनहितकारी परिषद की गतिविधियों को संचालित करेंगे इसके लिए हम से निरंतर परामर्श किया करते थे, विगत होली के अवसर पर उन्होंने हमें याद किया तो हम उनके घर गए,इस दौरान हमने अपने पूर्व शिक्षक और उनके पिताजी स्व.गिरजाकिशोर "मयंक" जी की याद में कुछ कार्यक्रम करने का निश्चय किया, हमारे अनुरोध पर उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय गिरजा किशोर त्रिपाठी मयंक की स्मृति पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया और पिता द्वारा रचित पुस्तक व स्मृति चुन्ह भेंट कर सम्मानित किया,अभी चंद दिनों पहले मैं जब ग्राम पिपरौली गया तो राह चलते मेरी उनसे मुलाकात हो गई उन्होंने स्वभाव के अनुरूप हमें पकड़ लिया और कुछ अतिथि सत्कार स्वीकार करने के लिए कहा इस पर हमने कहा आप का स्नेह ही अतिथि सत्कार है फिर कभी घर बैठकर आपका सत्कार ग्रहण करेंगे इसके बाद उन्होंने अगले किसी दिन मुलाकात करने का निर्देश देकर हमें विदा किया, हमें क्या पता था कि प्रकाश चंद त्रिपाठी "राघव" और हमारे परम मित्र का हम कभी आथित्य स्वीकार ही नहीं कर पाएंगे,अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पण के साथ दिवंगत आत्मा को शत शत नमन करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को निरंतर प्रगतिशील बनाए व परिजनों को इस महान कष्ट सहने में समर्थवान बनाए।।
1-फ़ाइल फ़ोटो प्रकाशचंद्र त्रिपाठी जी "राघव"
2/3-स्मृति फोटो
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