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पक्की छत न होने से झोपड़ी में रहने को मजबूर

*पक्की छत ना होने से झोपड़ी में रहने को मजबूर*


नही मिला सरकारी लाभ  

*कंचौसी।औरैया*
केंद्र व राज्य सरकार हर गरीब परिवार को आवासीय योजना का लाभ देने का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत है कि अभी तमाम गरीब परिवार के लोगों को पक्की छत नसीब नहीं हुई। वह खुले आसमान के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। उनकी गृहस्थी झोपड़ी में रखी है। वह किसी तरह अपना जीवन गुजार रहे हैं। कुछ दिनों में बारिश की शुरूआत होने वाली है। ऐसे में उनके सामने जिदगी गुजारना कठिन होगा। गरीब परिवार के लोगों को अपनी छत कब मिलेगी इसको लेकर कुछ अनुमान लगाना कठिन है। उनके पास आय का इतना भी साधन नहीं है कि वह पेट भर खा सकें। ऐसे में पक्की छत सिर्फ सपना रह गया है।विकास खंड सहार से चौदह किमी की दूरी पर बसा ढिकियापुर  गांव व उसके तीन मजरों में करीब चार हजार लोग निवास करते हैं। यहां का विकास सिर्फ सरकारी दस्तावेजों में दिख रहा है। गांव की हालत बेहद खराब है। यहां पर रहने वाले गरीब परिवारों की स्थिति और दयनीय है। इनके पास न तो पक्की छत है और न ही शौचालय व अन्य जरूरी योजनाओं का लाभ इनको मिला है। लोगों के घरों की हालत सरकारी विकास की पोल खोल रही है। गांव के रामनाथ कठेरिया  मजदूरी कर गुजर बसर करते हैं। उसके छत पर छप्पर डाल रखी है। शौच क्रिया के लिए बाहर खेतो में जाते हैं।रामनाथ ने बताया कि वह मजदूरी करके पत्नी व बच्चो  का भरण पोषण करते हैं। उनकी कमाई पर ही परिवार पूरी तरह से आश्रित है। अकेले की कमाई से पेट भरना ही कठिन हो रहा है। स्वयं एवं परिवार के रोटी का प्रबंध तो किसी तरह हो रहा है, लेकिन रहने के लिए उनके पास पक्की छत नहीं है। पालीथिन के नीचे गृहस्थी रखकर गुजारा कर रहे हैं। इतना ही नही एक लड़की विवाह योग्य हो चुकी है।रामनाथ ने बताया  उसने आवासीय लाभ के लिए सचिव समेत ब्लाक के अधिकारियों से मांग की, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई। उसने जिलाधिकारी से आवास दिलवाए जाने की मांग की ।

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