उत्तर प्रदेश न्यूज21/ऑल इंडिया प्रेस एसोसिएशन
औरैया। दिबियापुर के vgm डिग्री कालेज में महिलाओं ने सालों पुराने बरगद के पेड़ पर चली आ रही परम्परा के अनुसार पूजा अर्चना की।वही नगर दिबियापुर व आस पास महिलाओं ने अपने अपने पतियों की लंबी उम्र व स्वस्थ्य रहने की कामना करते हुए अपने अपने उपवास को तोड़ा।इस पर्व को लेकर निकट विवेकानंद डिग्री कालेज दिबियापुर में सुबह से ही महिलाओं में सप्तमी वरगद अमावस्या को लेकर भीड़ उमड़ी रही।
वट वृक्ष का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट वृक्ष या बरगद के पेड़ के तने में भगवान विष्णु, जड़ में ब्रह्मा तथा शाखाओं में शिव का वास होता है। वट वृक्ष को त्रिमूर्ति का प्रतीक माना गया है। विशाल एवं दीर्घजीवी होने के कारण वट वृक्ष की पूजा लम्बी आयु की कामना के लिए की जाती है।इस व्रत का प्रदर्शन करने वाले महात्मय पुराण में भी ऐसा ही किया जाएगा। वट सावित्री व्रत का उल्लंघन करने वाले बरगद के नाम से संबंधित है। इसलिए व्रत पेड़ पौरवण में जेंग वनों को विशेष रूप से शामिल किया गया है, वाइपलाईट वाइट बरगद का फल भी इसमें शामिल है। ये कहा गया है कि ये बहुत पवित्र है कि ब्रह्मा, विष्णु और महादेव का वास है। वट सावित्री पर इस पक्षी की आयु की आयु की संतान निगेट है।इस तरह से इस बरगद के पौधे की आयु है, ये 300 से अधिक जीवन जीने के लिए, इसी तरह जैसे आदर्श को आयु की आयु है। ये यश-भ्रम के समान है।
वृत्ताकार कथा के संस्करण, वापस सावित्री के 24 तारीख़ अमावस्या पर ही सावित्री ने यमराज से पति सत्यवान के प्राण के लिए। सावित्री ने बरगद के पेड़ के नीचे सत्यवान को लिटाया. विसुअल पुरस्कार प्राण वापिस प्राप्त. इसलिए इस खेल खेलने के लिए।
वट सावित्री व्रत की पूजा पटल की सामग्री
सरसों
सूचना का दोष
आम, लीची, मौसमी फल
मिष्ठान, बैठकें सा
मौली
रोली
बालाजी
लाल वस्त्र
कोनी
पूर्व
पान
सिंदूर
दूर बाँच
सुपारी
पंला (हाथ का पंला)
जलो
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