उत्तर प्रदेश न्यूज21/ऑल इंडिया प्रेस एसोसिएशन
गौतम बुद्ध नगर :-मनोज तोमर
गौतम बुद्ध नगर:- दादरी जारचा
पंडित कुलदीप शर्मा ने बताया कि शास्त्रो के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी मनाई जाती है. हिंदू धर्म के अनुसार, साल में 24 एकादशी आती हैं. इनमें से निर्जला एकादशी सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 21 जून दिन सोमवार यानी कल रखा जाएगा.निर्जला एकादशी की पूजा विधि
सभी व्रत, उपवासों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है इसलिये पूरे यत्न के साथ इस व्रत को करना चाहिए। व्रत करने से पहले भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि प्रभु आपकी दया दृष्टि मुझ पर बनी रहे, मेरे समस्त पाप नष्ट हो जाएं। निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें और एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक अन्न व जल का त्याग करें। अन्न, वस्त्र, जूते आदि का अपनी क्षमतानुसार दान कर सकते हैं। जल से भरे घड़े को भी वस्त्र से ढककर उसका दान भी किया जाता है। ब्राह्मणों अथवा किसी गरीब व जरुरतमंद को मिष्ठान व दक्षिणा भी देनी चाहिए। इस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उच्चारण भी करना चाहिए। साथ ही निर्जला एकादशी की कथा भी पढ़नी या सुननी चाहिए। द्वादशी के सूर्योदय के बाद विधिपूर्वक ब्राह्मण को भोजन करवाकर तत्पश्चात अन्न व जल ग्रहण करें।
निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें :-
1. भगवान विष्णु की पूजा करें।
2. किसी भी स्थिति में पाप कर्म से बचें अर्थात पाप न करें।
3. माता पिता और गुरु का चरण स्पर्श करें।
4. श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें।
5. श्री रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
6. श्री रामचरितमानस के अरण्यकाण्ड का पाठ करें।
7. धार्मिक पुस्तक का दान करें।
8. यह महीना गर्मी का होता है इसलिए प्याऊ की व्यवस्था करें।
9. अपने घर की छत पे पानी से भरा पात्र अवश्य रखें।
10 श्री कृष्ण की उपासना करें।
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