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स्वर्ण प्राशन से बढ़ाएं बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता आयुर्वेद चिकित्सालय बच्चों व बडों लिए नि:शुल्क आयुष किट का करेगा वितरण - क्षेत्रीय आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी

उत्तर प्रदेश न्यूज21/ऑल इंडिया प्रेस एसोसिएशन
इटावा।प्राचीन काल से ही हम सब भारतीय आयुर्वेद पद्धति को अपनाते चले आ रहे हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में आयुर्वेद  का विशेष महत्व है और वर्तमान में कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही  है। इसलिए आयुर्वेद पद्धति में स्वर्ण प्राशन के द्वारा हम सब अपने बच्चों की प्रतिरोधात्मक क्षमता को बढ़ा सकते हैं |  यह कहना है क्षेत्रीय आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ कप्तान सिंह का।
उन्होंने बताया आयुष विभाग बच्चों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए आयुष किट का जल्द ही नि:शुल्क वितरण किया जा रहा है, जिसमें आयुष 64, अगस्त हरितिकी,संशमनी वटी,अणु तेल सम्मिलित होंगे। स्वर्ण प्राशन से बच्चों की विकृति दूर कर बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता 
डॉ सिंह ने बताया यह आयुर्वेदिक दवाई बच्चों की रचनात्मक और क्रियात्मक विकृतियों को दूर करेगी। इसका प्रयोग न केवल मंदबुद्धि बच्चों बल्कि  गर्भ के अंदर अपरिपक्व शिशु के विकास के लिए भी किया जा सकेगा ।  गर्भस्थ शिशु के लिए भी यह ड्रॉप लाभदायक साबित होगा । आयुर्वेद पद्धति के अनुसार गर्भाधान के समय यह औषधि पाउडर के रूप में महिलाओं को दी जाती है, और छोटे बच्चों को ड्राप या गोली के रूप में दी जाती है। डॉ कप्तान सिंह ने बताया वर्तमान में जनपद में स्वर्ण प्राशन निशुल्क वितरित नहीं हो रहा है लेकिन मैं प्रयासरत हूं आयुर्वेद दवाओं के निर्माताओं और प्रशासन का सहयोग मिला तो गरीब बच्चों के लिए यह दवा निशुल्क उपलब्ध होगी।
पुष्य  नक्षत्र के समय स्वर्ण प्राशन देने का विशेष महत्व
आयुर्वेद पद्धति में स्वर्ण प्राशन औषधि पुष्य नक्षत्र में ईशान कोण की तरफ मुंह कर देनी चाहिए। इस औषधि से शरीर के प्रत्येक अंग प्रत्यंग की शक्ति और क्षमता में वृद्धि होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है | 
क्या है स्वर्ण प्राशन
डॉ सिंह ने बताया शहद और घी में स्वर्ण भस्म युक्त स्वर्णवर प्राशन का अनुपालन किया जाता है। इसके साथ ही इसके साथ  कुछ टॉनिक भी दिए जा सकते हैं,
 जो मेधा शक्ति को बढ़ाते हैं | शोध के अनुसार मस्तिष्क को और आंखों के विकास में स्वर्ण प्राशन का विशेष महत्व है।,  शहद और घी शरीर में रोगाणुओं से लड़ने के लिए शरीर के अंदर एंटीबॉडीज बनाने की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं।
स्वर्ण प्राशन के लाभ
डॉ सिंह ने बताया स्वर्ण प्राशन के प्रयोग से विकृतियों को ठीक कर बीमार या विकृत कोशिकाओं को पुनः सक्रिय और जीवंत किया जा सकता है। शरीर में विकृत स्वरूप ट्यूमर इत्यादि की सेल्स को नष्ट किया जा सकता है।कैंसर आदि रोगों से बचाता है | यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। शरीर में अनेक प्रकार के विषैले पदार्थों को दूर करता है ।सूजन की प्रक्रिया को रोकता है। याददाश्त और एकाग्रता को बढ़ाता है,  हार्ट मसल्स की शक्ति देता है ,शरीर में ब्लड सरकुलेशन को भी बढ़ाता है।

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