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जिला महिला अस्पताल में मनाया गया मासिकधर्म स्वच्छता दिवस,महिलाओं व किशोरियों को किया गया जागरूक

उत्तर प्रदेश न्यूज21
इटावा।महिलाएं पीरियड्स को लेकर खुलकर बात नहीं करतीं। न इस दौरान हाईजीन को लेकर जागरूक होती हैं। इस दौरान लड़कियों और महिलाओं को खास ध्यान रखना चाहिए। कई बार देखा गया है कि संक्रमण के बाद बच्चेदानी के कैंसर का खतरा भी हो जाता है। पांच खास दिनों में गंदे कपड़े का प्रयोग नुकसानदेह हो सकता है। पैड ही सबसे लाभकारी होता है। यह कहना है किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम परामर्शदाता प्रेमलता शुक्ला का। वह मासिकधर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर जिला महिला अस्पताल में उपस्तिथ महिलाओं व किशोरियों को जागरूक कर रहीं थी।
हर वर्ष 28 मई को मासिक धर्म व स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इस क्रम को जारी रखते हुए जिला महिला अस्पताल में शुक्रवार को यह दिवस मनाया गया। इस दौरान रामर्शदाता प्रेमलता शुक्ला व परिवार नियोजन परामर्शदाता निशा कुमारी ने किशोरियों की काउंसलिंग की और पेड्स वितरित किए।
परिवार नियोजन परामर्शदाता निशा कुमारी ने बताया कि माहवारी कोई समस्या नहीं, बल्कि एक वरदान है जो आगे जाकर माँ बनने का सौभाग्य मिलता हैं। उन्होने बताया कि माहवारी के दौरान 100 में से 90 लोगों को पेट दर्द कि समस्या होती हैं जो बाद में ठीक भी हो जाती हैं। (10-19 वर्ष ) यह अवस्था है जिनमें तेजी के साथ शारीरिक एवं मानसिक बदलाव होने लगते हैं। खासतौर से लड़कियों में पीरियड्स का आना, जो हर महीने आने लगते हैं और उस समय किशोरियों को बहुत सारी समस्याएं जैसे- पेट में दर्द, कमर दर्द, चिड़चिड़ापन आदि समस्याएं घेर लेती हैं। जिस वजह से किशोरियाँ अपने खान-पान की ध्यान नहीं रखती हैं और धीरे-धीरे एनीमिक होने लगती हैं।
इसके अलावा परामर्शदाता प्रेमलता ने स्वच्छता एवं साफ सफाई के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि सबसे पहले अपनी व्यक्तिगत साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासतौर से माहवारी के दौरान साफ-सफाई रखने से कई प्रकार की संक्रमणों से होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता हैं। 
उन्होने खान-पान के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि हर महीने जो रक्त शरीर से बाहर निकलता हैं तो उसकी भरपाई आयरन युक्त भोजन से करना चाहिए जैसे- हरी सब्जियाँ, अंकुरित चना एवं आयरन युक्त गोली आदि द्वारा, ताकि सही पोषण मिल सके और वह एनीमिक होने से बच सकें। 
माहवारी का प्रबंधन व निपटान 
माहवारी में सूती कपड़े के पैड का उपयोग सबसे अच्छा रहता है। अगर कपड़े का पैड नहीं है तो सूती मुलायम कपड़े को पैड की तरह मोड़कर उपयोग करना चाहिए। हर दो घंटे में पैड बदलना चाहिए। पैड बदलने के समय जननांग को पानी से धोकर सुखा ले। उपयोग किये हुए पैड को साबुन व ठंडे पानी से धोना चाहिए व् तेज धूप में सुखाना चाहिए। ऐसा करने से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। सूख जाने के बाद पैड को एक साफ़ धुली कपड़े की थैली में मोड़कर रखें। माहवारी में उपयोग किये गए पैड या कपड़े को खुले में नहीं फेंकना चाहिये क्योंकि ऐसा करने से उठाने वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा हो सकता है। हमेशा पैड को पेपर या पुराने अखबार में लपेटकर फेंकना चाहिये या पैड को जमीन में गड्ढा खोदकर गाड़ भी सकते है।
जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में 20-25 महिलाएं व किशोरियां शामिल हुई जिनको काउंसलिंग दी  गई और यहां कोरोना प्रोटोकॉल का  पूर्णता पालन किया गया।

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