उत्तर प्रदेश न्यूज21
★जनपद में ब्लैक फंगस के लिए आरक्षित किए गए 20 बेड और विशेषज्ञ चिकित्सकों की बनाई गई समिति
इटावा:कोरोना संक्रमण के बीच ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) भी तेजी से फैल रहा है । यह कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए खतरा बन गया है, लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है, बचाव करने से इस रोग को रोका जा सकता है। इसके लिए डॉ भीमराव अंबेडकर संयुक्त चिकित्सालय पुरुष में 20 बेड ब्लैक फंगस से ग्रसित रोगी के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं| इसके साथ ही सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक नेत्र व गला रोगियों के लिए ओपीडी खोल दी गई है, वह इस दौरान इलाज करा सकते हैं | यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ बी डी भिरोरिया का |
सीएमओ ने बताया कि ब्लैक फंगस अनियंत्रित शुगर के मरीजों में ज्यादा होने का खतरा होता है। इसलिए यह जरूरी है कि जिन मरीजों की शुगर अनियंत्रित रहती है वह अपनी शुगर को नियंत्रित रखें। जिन लोगों को कोविड-19 का संक्रमण हुआ है वह स्टेरॉयड डॉक्टर की सलाह पर ही लें। इसके साथ ही जिन रोगियों को ऑक्सीजन लग रही है वह रोजाना ऑक्सीजन के रेग्यूलेटर में लगे पानी को बदलें।
सीएमओ ने कहा कि जिले में अभी तक ब्लैक फंगस से ग्रसित कोई भी व्यक्ति नहीं मिला है, सभी लोग सतर्क और साबधान रहें, लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल में आकर संबंधित डाक्टर को दिखाएँ |
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसएस भदौरिया का कहना है कि म्यूकोरमाइकोसिस नामक इस रोग के लिए जनपद में डॉक्टर्स की एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई गईं है, जिसमें फिजीशियन डॉ बीके साहू, सर्जन डॉ मंगल सिंह,नेत्र विशेषज्ञ ,डॉ जयदेव और नाक व गला विशेषज्ञ (इएनटी) डॉ जेपी चौधरी को शामिल किया गया है।
डॉ भदोरिया ने बताया कि फंगस के संक्रमण की शुरुआत नाक से होती है । नाक से ब्राउन या लाल कलर का म्यूकस जब बाहर निकलता है तो यह शुरुआती लक्षण ब्लैक फंगस का माना जाता है, फिर यह धीरे धीरे आंखो मे पहुंच जाता है । नेत्रों में लालीपन, कन्जेक्टेवाइटिस के लक्षण इस रोग में उभरते हैं। नेत्रों में भंयकर पीडा होती है और फिर विजन पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इस फंगस का असर नेत्रों के रेटिना पर पडता है फिर ब्रेन,नर्वस सिस्टम व ह्रदय तक पहुँचने से मृत्यु तक हो जाती हैं।
इसके साथ ही कहा कि ब्लैक फंगस से बचाव के लिए साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखें। मरीज के बिस्तर की चादर प्रतिदिन बदली जानी चाहिए। तकिया इत्यादि को भी साफ रखे जाने की जरूरत है। लंबे समय तक तकिये को धूप नहीं दिखाई गई होती है, इस कारण उसमें भी फंगस हो जाता है, इससे मरीज को फंगस लगने का चांस बढ़ जाता है। इसलिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
बचाव के तरीके
- ब्लड शुगर पर पूरा नियंत्रण रखें
- स्टेराइड का उचित, तर्कसंगत और विवेकपूर्ण प्रयोग
- कोविड मरीज को ऑक्सीजन देते समय उसका पानी रोजाना बदला जाए
- दिन में दो बार नाक को सलाइन से धोएं
- जो कोविड रोगी अधिक जोखिम वाले हैं, उनकी नाक धोना और एमफोरेटिस बी से उपचार
-साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें
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