गंगा किनारे पड़े शव अब यहां रह रहे लोगों के लिए परेशानी का सबब बनने लगे हैं. शवों से बदबू आने लगी हैं. गंगा नदी के किनारे दफनाए गए शव बाहर की ओर दिखने लगे हैं. बदबू तो आ ही रही है. अब लोगों को अपनी तबीयत बिगड़ने की चिंता भी सताने लगी है. ऐसे ही हालात कानपुर, कन्नौज, उन्नाव और प्रयागराज में भी हैं. इन चारों जिलों में गंगा किनारे बसे लोगों से बात की और वहां के हालातों को जानने की कोशिश की. पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट...
कानपुर के हालः
कानपुर शहर के नानामऊ घाट के किनारे रहने वाले विजय कुमार मिश्रा ने बताया कि नदी किनारे शवों की संख्या तब से बढ़ने लगी है, जब से कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़ रही है.
कन्नौज के हालः
कुछ ऐसा ही नजारा कन्नौज के मेहंदी घाट पर भी दिखा. जहां गंगा किनारे 150 से 200 शव रेत में धंसे हुए दिखाई दे रहे हैं. कुछ लोग इन शवों को और अंदर दफनाने के लिए रेत खोदते दिखाई दे रहे हैं. कन्नौज के एसडीएम गौरव शुक्ला ने आजतक को बताया कि इन घटनाओं की जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम बनाई गई है. हालांकि, उनका ये भी कहना है कि ये शव पुराने भी हो सकते हैं.
उन्नाव के हालः
बक्सर के घाट के पास रहने वाले लोगों का दावा है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव की वजह से भी लोगों की मौत हो रही है. यहां दाह संस्कार की भी कोई व्यवस्था नहीं है. यही वजह है कि लोग गंगा किनारे रेत में शव दफनाने को मजबूर हैं. कुछ लोग ये भी दावा करते हैं कि घाटों के किनारे दफन शवों को खाने कुत्ते भी आ जाते हैं. हालांकि, उन्नाव के डीएम रविंद्र कुमार इन दावों को खारिज करते हुए कहते हैं कि घाटों के पास दाह संस्कार की सुविधा करने के लिए तेजी से कोशिश की जा रही है.
प्रयागराज के हालः
गंगा नदी के किनारे 100 से ज्यादा शव दफन किए गए हैं. प्रयागराज से 40 किलोमीटर दूर श्रंगवेर धाम में रेत में हजारों की संख्या में शव दफनाए गए हैं. श्रंगवेर धाम एक धार्मिक स्थल भी है और माना जाता है कि यहीं भगवान राम और निषादराज का मिलन हुआ था. प्रशासन ने शवों को छिपाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहा. स्थानीय बताते हैं कि वो आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं और लकड़ियां महंगे दामों पर बेची जा रही हैं. यही वजह है कि लोग रेत में शव दफना रहे हैं.
सरकार क्या कर रही?
गंगा किनारे शव दफनाए जाने की खबरें सामने आने के बाद यूपी सरकार ने नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स (एनडीआरएफ) और प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (पीएसी) के जवान तैनात कर दिए हैं, ताकि अब कोई रेत में शवों को न दफनाए. हालांकि, जब आजतक की टीम इन घाटों पर थी तो कोई भी अधिकारी यहां दिखाई नहीं दिया.
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