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*देश की जनता को कोविड-19 महामारी से बचाने के लिए प्रदेश और केंद्र की सरकार को "लॉक डाउन" का दूसरा विकल्प तलाशना ही होगा---घनश्याम सिंह* *वरिष्ठ पत्रकार व त्रिभाषी साहित्यकार*

*देश की जनता को कोविड-19 महामारी से बचाने के लिए प्रदेश और केंद्र की सरकार को "लॉक डाउन" का दूसरा विकल्प तलाशना ही होगा---घनश्याम सिंह*
                       *वरिष्ठ पत्रकार व त्रिभाषी साहित्यकार*
■ *पिछले साल किये गए लॉक डाउन का क्या परिणाम आया समझ से परे*
■ *लॉक डाउन करके न जनता को पूर्णतया आवागमन से रोका जा सकता है न अधिकारियों को*
■ *कोरोना वायरस को हराने के लिए चिकित्सा जगत को वैश्विक स्तर पर गहन शोध की नितांत आवश्यकता*
    " बड़े रंजो गम का विषय है कि पूरे विश्व समुदाय में तहलका मचा देने वाली कोविड-19 महामारी के वायरस से निपटने में  हमारी प्रदेश व केंद्र सरकार पूर्णतया सफल नहीं साबित हो पा रही है, ऐसी परिस्थिति में प्रदेश और केंद्र सरकार को देश की जनता को कोविड-19 महामारी से बचाने के लिए विकल्प के तौर पर रखे गए  लॉक डाउन के दूसरे विकल्प को तलाशना होगा, आज लॉक डाउन एक वर्ष से ज्यादा हो गया है, प्रदेश और केंद्र सरकार को इस महामारी से बचाने के लिए पिछले साल किए गए लॉक डाउन के घाटे मुनाफे को भी अपडेट करना होगा, हमें देखना होगा कि पिछले साल के लॉक डाउन का क्या परिणाम रहा? क्या पिछले साल का लॉक डाउन अपनी उम्मीदों पर खरा उतरा? उसके क्या-क्या  परिणाम देश के सामने आए, इस महामारी से बचने विकल्प के तौर पर पिछले वर्ष 22 मार्च को लॉक डाउन लागू किया गया था, हमारी सरकार ने कोविड 19 की जंग जीतने के लिए बहुत तैयारियां कीं, तमाम कार्यक्रम आयोजित किए,मास्क की अनिवार्यता लागू की गई, सोशल डिस्टेंस और बचाव की तमाम विधियाँ बताई गयीं,तथा उनके अनुपालन के लिए भरपूर कड़ाई की गई, पर शायद उनका अपेक्षित परिणाम नहीं आया, किंतु शायद जल्दबाजी में इसके परिणाम और दुष्परिणाम सोचने का मौका नहीं मिला, तमाम मजदूर और परेशान साधन विहीन लोग चलते-चलते काल के गाल में समा गए और देश के तमाम उद्योग धंधे चौपट हो गए किसान और नौजवान बेरोजगारी के चलते अधमरा हो गया, तमाम सावधानी के बावजूद भी हम कोविड 19  की जंग नहीं जीत पाए,हम लगातार जनता से को  नियमों का पालन करने के उपाय बताते रहे,अधिकारी इसका पालन करते रहे,और अधिकारी भी इसके शिकार हो गए, हमारे देश का चिकित्सा विज्ञान भी कोई कारनामा नहीं कर पाया जिससे कोरोना वायरस को हराने में  पूर्णतः सफलता मिलती, समझ से परे है कि यह बनावटी *कोरोना वायरस* कितना बलशाली है जो कोविड 19 के निर्देशों का पालन करने व उपचार के बावजूद ठीक नहीं हो रहा है, चिकित्सा जगत लगातार अपने प्रयास कर रहा है किंतु "कोराना" वायरस को खत्म नहीं किया जा पाया है, हमें देखना होगा कि "कोराना" वायरस का जीवन चक्र कितना बलशाली है, जो मास्क व सेनिटाइजर से प्रभाव  हीन हो जाता है, पर यह खत्म नहीं हो रहा है, कहीं हमारे चिकित्सा वैज्ञानिकों से इसके चक्र को समझने में  चूूूक तो  नहीं हो रही है,   हमें "कोरोना" वायरस की चैन के बारे में भी गंभीरता से विचार करना होगा, मित्रों क्या पिछले साल किए गए लॉक 
डाउन से चैन टूटी, हम तो समझते हैं वायरस की
चेन नहीं टूटी पर देश की जनता और अर्थव्यवस्था की चैन जरूर टूट गई, जिसका सबसे बड़ा 
दुष्परिणाम शिक्षा पर व विद्यालयों पर पड़ रहा है, 1 वर्ष हो गए विद्यालय बंद चल रहे हैं सरकार बंद विद्यालयों में शिक्षकों की ड्यूटी करा रही है और शिक्षकों को वेतन भी दे रही है,निजी स्कूलों की व्यवस्था भी खराब है,कुछ विद्यालय ऑनलाइन शिक्षण करा रहे हैं, बाकी हाथों पर हाथ धरे बैठे हैं, पिछले लॉक डाउन में जनता का आवागमन नहीं रुका, सरकार अपनी रेल,बस और वायु सेवाएं बंद किए रही पर देश व्यापी डग्गामार बसें लगातार कोरोना ढोतीं रहीं, आखिर पूर्णत्या आवागमन कैसे बंद हो सकता है? हम समझते हैं कि देश की जनता को जीवित रहने के लिए खाने पीने और दवाई,*दारू* व अन्य सेवाओं के लिए बाहर जाना ही होगा यदि उन्हें बाहर जाना होगा तो कोरोना महामारी की चैन को कैसे खत्म किया  जा सकता है?,हमारे हमारे देश के सफ़ेद पोश नेताओं को  भी सोचना चाहिए कि जहां "कोरोना" महामारी की चैन तोड़ने के लिए विद्यालय, अस्पताल बंद है वहां शराब के ठेके व चुनाव चालू हैं,सफेदपोश नेता रात दिन अपनी अपनी जीत के लिए समर्थन के लिए  गांव गली का दौरा कर रहे हैं और पोलिंग स्टेशनों पर लंबी लंबी कतार लगती हैं, रैली में हजारों लाखों की भीड़ जुटती है, चिकित्सा जगत स्वीकार करता है कि कोरोना के वायरस को खत्म करने का कोई औषधि विकल्प नहीं है तो समझ में नहीं आता है कि पॉजिटिव केस वालों को भर्ती करने के बाद क्या औषधियां दी जाती है,लोग ठीक भी हो जाते हैं और उन्हें बाद में छुट्टी भी दे दी जाती है, इस संकट की बड़ी घड़ी में हमें पूरे राष्ट्र व विश्व समुदाय के कल्याण के लिए संयुक्त और सत प्रयास करना होगा यह महामारी कोई बहुत बड़ी लाइलाज नहीं है हम इसे परास्त करने में अवश्य सफल होंगें, हमें प्रशासनिक प्रयासों और सामाजिक सहयोग में योगदान की भी प्रबल आवश्यकता है, सब लोग जो जहां है उसे इसे हराने के लिए मन से उठ ख़ड़े हों,वह सर्व शक्तिमान ईश्वर जिसने हमें बनाया है वह हमारी अवश्य रक्षा करेगा,
आओ हम सब उस ईश्वर से प्रार्थना करें--
            *"हे ईश्वर*
            *मेरा मार्गदर्शन कर,*
            *मेरी रक्षा कर,*
            *और मुझे एक देदीप्यमान           सितारा बना,*
            *तू शक्तिशाली एवं बलशाली है।।*
 हम सभी लोग कोविड 19 से जीतने में अवश्य कामयाब होंगे, हम अपने को किसी प्रकार कमजोर न समझें,                         "केवल नहीं राई का पर्वत,
             कर्ता ही कर्ता संसार में ।
           तुम भी कर सकते सुक्ष्म धरा!
              एक ही धनुष टंकार में।।
              (निज काव्य ग्रंथ से)
        ---घनश्याम सिंह वरिष्ठ पत्रकार
         व त्रिभाषी साहित्यकार

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