उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता
इटावा:जनपद में क्षय रोग के प्रति लगातार जागरूकता बढ़ रही है। दस्तक अभियान व शासन द्वारा चलाए गए अन्य जागरूकता अभियान से जनपद में लोग क्षय रोग के प्रति जागरूक हुए हैं। इसके बावजूद अभी इस बात की ज़रूरत है की सभी को पता हो कि टीबी यानी क्षयरोग न सिर्फ हमारे फेफड़ों को क्षतिग्रस्त करता है बल्कि हड्डियों पर भी टीबी का असर होता है। सही समय पर पहचान और इलाज कराया जाए तो यह रोग पूरी तरह से साध्य है। यह कहना है जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ बीएल संजय का। उन्होंने बताया कि जनपद में 24 मार्च को मनाये जाने वाले विश्व क्षय रोग दिवस पर जनजागरूकता रैली निकाली जायेगी और सार्वजनिक स्थानों पर 5000 मास्क का वितरण भी किया जाएगा ।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि हड्डियों पर भी टीबी का असर होता है। हड्डियों में होने वाली टीबी को बोन टीबी भी कहते हैं। उन्होंने बताया - रीढ़ की हड्डी, हाथ की कलाइयां कुहनियां, जोड़ों पर इसका असर ज्यादा होता है। इसकी सही समय पर पहचान कर ली जाए तो इलाज द्वारा यह रोग पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। इसीलिए बोन टीबी की सही समय पर सही जांच हो।
लक्षणों पर रखें नजर
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि बुखार, थकान ,रात में पसीना आना, बेवजह वजन कम होना बोन टीबी के लक्षण हैं। हड्डी के किसी एक बिंदु पर असहनीय दर्द होता है और धीरे-धीरे मरीज का बॉडी पोस्चर और चलने का तरीका बिगड़ने लगता है। कंधे झुका कर चलना, आगे की ओर झुक कर चलना, कई बार हड्डियों में सूजन भी आ जाती है। कई बार बोन टीबी से पीड़ित मरीजों को कफ न निकलने से यह पता नहीं चल पाता कि वह टीबी से पीड़ित हैं | इसीलिए शुरुआती लक्षण स्पष्ट होने में वर्षों लग जाते हैं। बोन टीबी में सामान्यतया रात में दर्द ज्यादा होता है।
रीढ़ की हड्डी पर ज्यादा खतरा
टीबी का सबसे ज्यादा खतरा रीढ़ की हड्डी पर होता है, क्योंकि रीढ़ की हड्डी की टीबी को अगर सही समय पर पहचान न हो पाए तो यह गंभीर लकवे का कारण बन जाती है । गंभीर मामलों में रीढ़ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है जो शरीर के निचले हिस्से में लकवे का कारण बन जाता है। रीढ़ की हड्डी बाहर निकल कर कूबड़ का भी रूप ले सकती है।
जनपद में हो रही है टीबी की जांच
टीबी अस्पताल के डाटा एंट्री ऑपरेटर वैभव त्रिपाठी ने बताया कि जनवरी में359 टीबी रोगी फरवरी में 371टीवी रोगी चिन्हित किए गए। जनवरी 2020 से दिसंबर 2020 तक 14537 लोगों की टीबी की जांच हुई है। इनमें सरकारी अस्पताल में चिन्हित रोगी 2680 और निजी चिकित्सकों द्वारा 845 रोगी अपना इलाज करवा रहे हैं। इन सभी रोगियों का एचआईवी व यूडीएसटी टेस्ट कराया गया है। निजी चिकित्सकों से टीबी का इलाज कराने वाले 845 रोगियों को ऑनलाइन सूचित भी किया गया है। अब तक दस्तक अभियान में 14 संभावित लोगों की टीबी की जांच की गई है, जिनमें दो लोग टीबी ग्रसित पाए गए हैं ।
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