उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों 2021को लेकर माहौल अब अपने चरम पर है. आरक्षण की सूची जारी होने के बाद से प्रत्याशी अपनी तैयारियों में जुट गए हैं. चुनाव जीतने के लिए वे घर-घर का चक्कर लगाने लगे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए प्रत्याशी इतनी मेहनत कर रहे हैं, उनको सरकार कितनी सैलरी देती है.
आइए जानते हैं...
कितनी होती है ग्राम प्रधान की सैलरी
पंचायत चुनाव में सबसे ज्यादा क्रेज ग्राम प्रधान पद के लिए ही होता है.
यह त्रिस्तरीय चुनाव का सबसे पहला स्तर होता है. गांव के लोग किसी एक को ग्राम प्रधान और तय संख्या के हिसाब से ग्राम पंचायत सदस्य चुनते हैं. गौरतलब है कि सरकार विकास कार्यों के लिए पैसा ग्राम प्रधान को देती है. हालांकि, विकास निधि से अगर प्रधान पैसा कमाने की कोशिश करता है, तो यह गैर कानूनी है. इसके इतर सरकार, प्रधान को हर महीने 3500 रुपये मानदेय देती है. वहीं, ग्राम पंचायत सदस्य को कोई भी मानदेय नहीं मिलता है.
कितनी होती है क्षेत्र पंचायत सदस्य की सैलरी
ग्राम प्रधान के अलावा क्षेत्र पंतायत सदस्य (BDC) के पद के लिए जबरदस्त दावेदारी देखने को मिलती है. ग्राम पंचायत के लोग ही अपने मताधिकार का प्रयोग करके क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव करते हैं. जो आगे चलकर ब्लॉक प्रमुख को चुनते हैं. क्षेत्र पंचायत सदस्यों को कोई मानदेय नहीं मिलता है. लेकिन सरकार सदस्यों को भत्ता देती है. इसमें यात्रा भत्ता भी शामिल होता है. इसके अलावा पंचायत की बैठक में शामिल होने के लिए हर बार 500 रुपये दिए जाते हैं.
जिला पंचायत सदस्य
इन चुनावों के अलावा इस बार जिला पंचायत सदस्य के लिए भी एक साथ वोटिंग होने वाली है. जिला पंचायत सदस्यों के वार्ड तय किए जाते हैं, जहां जिला पंचायत सदस्य चुने जाते हैं. जो आगे चलकर जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करते हैं. जिला पंचायत अध्यक्ष का एक राजनीतिक रुतबा होता है. इस चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के बीच भी काफी रस्साकसी देखने को मिलती है. जिला पंचायत अध्यक्ष को सरकार हर महीने 14000 रुपये मानदेय देती है. वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करने वाले जिला पंचायत सदस्यों को क्षेत्र पंचायत सदस्यों की तरह कोई भी मानदेय नहीं मिलता है. हालांकि, भत्ते का प्रावधान इस पद के लिए किया गया है. जिला पंचायत सदस्यों को हर बैठक में शामिल होने के लिए 1000 रुपये का भत्ता मिलता है.
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