उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता घनश्याम सिंह
औरैया
इटावा:संघर्ष और सफलता बनी मेरी कहानी
"बचपन से हील मन में एक ललक थी की इस समाज को कुछ दे सकूँ। एक साधारण से परिवार में पली, हमेशा दुसरो के प्रति भावमुक्त हो जाती थी। समाजसेवा की भावना ने इन्हें हमेशा प्रेरित किया और ये छोटे मोटे तरीकों से मददगारों की मदद करती रही। पढ़ाई पूरी होने के बाद एक शिक्षिका के रूप में इनकी शुरुआत एयर फ़ोर्स अकादमी चकेरी कानपूर से हुई और वहीं से संघर्ष भी शुरू हुआ। शिक्षिका एक माँ भी होती है , नौकरी के साथ साथ अपने बच्चों की परवरिश भी सही ढंग से होनी चाहिए। इनके पति बेसिक शिक्षा विभाग इटावा में और ये कानपूर एयर फ़ोर्स में एक छोटे बच्चे के साथ शिक्षिका और माँ का संघर्ष पूर्ण दायित्व निभाती रहीं। गरीबों की मदद करना इनकी दिनचर्या में शामिल हो गया। कुछ समय बाद अलका भी पति के कारण बेसिक शिक्षा विभाग में आईं और प्रथम नियुक्ति सन २००६ में प्राथमिक विद्यालय गपचरियापुर सहार, औरैया में मिली। कानपुर से आधी रात यानि की रात्रि साढ़े तीन बजे ही निकलना पड़ता था (एक ही ट्रेन होने के कारण) और १० बजे क विद्यालय में सुबह ९ बजे ही स्कूल पहुँच जाती थी। मगर ऐसा हमेशा संभव नहीं था अतः ७ बजे के विद्यालय में इन्हें औरैया में ही अपना निवास बनाना पड़ा जिससे की एक भी उंगली इनकी तरफ न उठे। विद्यालय घर से २० की० मी० दूर होने पर भी दूसरी बार गर्भवती होते हुए भी अपनी स्कूटी से विद्यालय समय से जाती रही। विद्यालय में प्रभावी शिक्षण के कारण छात्र संख्या में बढ़ौतरी देख इनके योगदान को अधिकारियों द्वारा सराहा गया । इनके द्वारा यूनिफार्म की महत्ता अभिभावकों को बताया और समझाया गया और देखते ही देखते विद्यालय के सभी छात्र यूनिफार्म में आने लगे।
ग्राम प्रधान एवं ग्राम वासियों द्वारा इस कार्य को सराहा गया।
जुलाई २०१० में प्राथमिक विद्यालय समाधान में समायोजन में आयीं जहाँ छात्र संख्या मात्र ४७ ही थी जो की जनसम्पर्क द्वारा ६२, ६८ और २०१३ में ७५ मात्र पहुँच गयी। अलका द्वारा इस छोटे से गाँव में घर घर जा कर अभिभावकों से मिलना अत्यंत सार्थक रहा। जुलाई २०१३ में पदोन्नति में उच्च प्राथमिक विद्यालय गौरी गंगा प्रसाद में विज्ञान शिक्षिका के रूप में नियुक्त हुईं। विज्ञान के छेत्र में रुचिकर योगदान देख विज्ञान और गणित विषय की जिले की संदर्भदाता बना दी गयीं। अब बच्चों के साथ साथ समय समय पर शिक्षकों को भी ट्रेनिंग देने लगीं। ट्रेनिंग के दौरान शिक्षा नीतियों के साथ मददगार होना भी सबके दिलों में अपनी एक अलग छवि बना ली। वर्ष २०१५ में इंग्लिश मीडियम स्कूल ज्वाइन करने का सुनहरा मौका मिला जहां भोले भाले बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षण देने में मज़ा तो आ ही रहा था मगर कठिनाई भी बहुत हो रही थी। अलका यादव का कहना है की वह हार नहीं मानी, डटी रहीं और छात्र संख्या १४३ से बढ़कर २२४ तक बढ़ाने में सार्थक रहीं। पास के प्राइवेट स्कुल के बच्चों ने भी दाखिला इस सरकारी स्कूल में करवाया। लगातार मेहनत करने पर बच्चे अंग्रेजी बोलने लगे एवं अभिभावक भी काफी प्रसन्न हुए। वर्ष २०१६ और २०१७ में विद्यालय में अकेले और छात्रसंख्या अधिक होने के कारण जीवन बहुत संघर्षपूर्ण रहा परन्तु अलका हार नहीं मानीं। समय समय पर निरीक्षण होता रहा प्रशंसा भी हुई और कठिनाइयां भी आईं। विद्यालय परिसर की सुंदरता बनाने के लिए अधिक से अधिक पौधे, क्यारियां, वाल पेंटिंग आदि करवाए। विद्यालय भवन की रूप रेखा ही बदल गयी।
वर्ष २०१८ में माननीय मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी द्वारा औचक निरीक्षण हुआ जिसमें सभी व्यवस्थाएं उत्कृष्ट पाए जाने पर शिक्षक दिवस पर जिला अधिकारी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रशस्ति पत्र से अलका यादव को सम्मानित किया गया। यहां तक का सफर बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा परन्तु पूरी लगन से कार्य करने के कारण विद्यालय हमेशा ही अच्छे विद्यालयों में गिना जाता है। अलका कहना चाहती हैं की यहां मुझे अपनी कुशलता की पहचान झलकती है। और आप लोगों को यह भी सन्देश देना चाहती हैं की अगर किसी को आप दान देना चाहते हैं तो भिक्षा में शिक्षा ही दें क्यूंकि गरीब वो नहीं है जिसके पास धन नहीं है बल्कि गरीब वो है जिसके पास शिक्षा नहीं है। कोई भी बालक या बालिका अगर आपके आसपास भीख मांगता हुआ दिखाई दे तो उसे पैसा न दे कर शिक्षण सामग्री ही दें जैसे की कहानी की किताब, नोटबुक, पेन या कोई खिलौना और हो सके तो उसका नामांकन पास के सरकारी स्कूल में अवश्य करवाए।
गरीब बालिकाओं की मदद अवश्य करें एवं उन्हें आगे बढ़ाएं।
जिस तरह से अलका एक महिला होते हुए भी कमज़ोर नहीं हुईं एवं एक सशक्त नारी बनकर डटी रहीं और अपने शिक्षिका होने के कर्त्तव्य को निभाती रहीं उसी तरह सभी महिलाएं सशक्त बनें। वर्तमान में इनका विद्यालय नगला जय सिंह ही इनका पहचान बन गया है। बताते चलें की इस समय अलका यादव औरैया जिले की एस० आर० जी० भी हैं। इस छेत्र में भी इनका कार्य सराहनीय है।चल रहे मिशन शक्ति अभियान के क्षेत्र में अलग अलग जगहों पर विभ्भिन्न कार्यों का आयोजन कर महिलाओं को जागरूक करना और सशक्त बनाना, सरकार द्वारा विभ्भिन्न योजनाओं की जानकारी देना, बालिकाओं को सुरक्षा प्रदान करने हेतु विभ्भिन्न योजनाएं बताना, फिल्म द्वारा लैंगिक समानता की जानकारी देना, स्त्रियों को स्वावलम्बी बनाना अन्य कई जानकारियों को सांझा करना इनकी दिनचर्या बन गयी है।शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान देने के साथ साथ समाज में महिलाओं एवं बालिकाओं को एक नायाब तरीके से मदद करना इनकी आदत सी बन गयी है। ये दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार मिलती हैं।
अलका का कहना है - ध्यान दें-
व्यक्ति क्या है यह महत्वपूर्ण नहीं हैं,
परन्तु व्यक्ति में क्या है यह बहुत महत्व पूर्ण है।
नारी हूँ कमज़ोर नहीं, पथरीली राहों को देखकर डरी नहीं।जब मन में हो दृढ़संकल्प, मिल जाते हैं कई विकल्प , समस्याएं हो जाती हैं अल्प।
إرسال تعليق
If You have any doubts, Please let me know