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प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही उर्वशी की सफलता का रहस्य

उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता
इटावा:कोरोना काल में अचानक आई आपदा से कई लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इस आपदा से लाखों लोग पीड़ित हुए। लेकिन कुछ फ्रंटलाइन वर्कर्स ने इस आपदा के समय भी उत्कृष्ट सेवा भाव से कार्य कर, सिद्ध किया कि वह अपनी सूझबूझ से हर  अवसर के लिए तैयार हैं,और यही उनकी सफलता का रहस्य है। 
डॉ भीमराव अंबेडकर पुरुष चिकित्सालय में सहायक नर्सिंग अधीक्षक  के पद पर कार्यरत उर्वशी दीक्षित ने भी करोना काल में अपने सेवा भाव से  एक बार फिर सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा। उनकी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगभग 200 प्रशस्ति पत्र व प्रमाण पत्र जनपद व राज्य स्तर उन्हें प्रदान किए  जा चुके हैं। दूसरों की मदद करना और विपरीत परिस्थितियों में भी सेवा भाव से काम करना  उन्होंने अपने पिताजी से सीखा।जब देश में लॉकडाउन लगाया गया उस समय अस्पताल  में पर्याप्त मात्रा में मास्क भी उपलब्ध नहीं थे।तब उन्होंने खुद मास्क सिल कर स्वास्थ्य कर्मियों, सफाई कर्मियों को वितरित किए।
उर्वशी ने स्वयं ही सारे अस्पताल में सैनिटाइजेशन का काम किया। और सभी स्वास्थ्य कर्मियों को साफ सफाई व कोरोना से बचाव के लिए जागरुक किया।उर्वशी अस्पताल में ड्यूटी खत्म करने के बाद वह देर रात तक कम्युनिटी किचन में जाकर सहयोग प्रदान करती थी। अस्पताल में मरीजों व इटावा जनपद से गुजरने वाले प्रवासियों के भोजन की व्यवस्था वह स्वयं देखती थी। वह बताती हैं कभी-कभी खाने के पैकेट कम पड़ जाते थे तो वह स्वयं कम्युनिटी किचन में जाकर खाना बनवाने का काम भी करती थी। और जल्द से जल्द जरूरतमंदों के पास भोजन के पैकेट पहुंचाती थी।  कोरोना काल में जो मरीज भर्ती थे ,उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने पर स्वयं विशेष बल देती थी ।साथ ही उन्हें निशुल्क साबुन ,मास्क ,फल ,दवाई समय पर उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाती थी।
चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसएस भदौरिया ने बताया की उर्वशी अपने कार्य के प्रति निष्ठावान व ईमानदार हैं। साथ ही उनकी कार्यशैली से अस्पताल में सभी प्रभावित हैं। उन्होंने बताया की कोरोना वार्ड में भर्ती मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की साथ ही उन सबको मानसिक रूप से सहयोग प्रदान किया।  उन से संवाद कर मरीजों की जिज्ञासाओं को शांत किया साथ ही उनके स्वस्थ होने के लिए  मरीजों को आश्वस्त किया।  इस तरह के सहयोग से मरीजों का उत्साहवर्धन हुआ।  सामान्यता जब मरीज सामान्य परिस्थितियों में या करोना काल में दवाई समय पर नहीं लेते या व्यवस्थाओं के साथ सामंजस्य नहीं करते, तो उन्होंने उनके साथ थोड़ी सख्ती बरती । लेकिन यह सब उनके जल्द स्वस्थ होने के लिए करना जरूरी था। मरीज जब स्वस्थ हो जाते हैं तब  उन्हें उर्वशी जी की कही बात समझ में आती है और सहयोग करते थे।
चिकित्सालय के चिकित्सालय प्रबंधक डॉ निखिलेश ने बताया उर्वशी कई वर्षों से ओटी इंचार्ज की भूमिका निभा रही हैं। उनका कार्य बहुत ही अच्छा है। साथ ही उनकी कार्यशैली से मरीज भी उनकी सराहना करते हैं। उन्होंने बताया लगभग प्रतिवर्ष उनको उनके कार्यों के लिए हॉस्पिटल द्वारा प्रमाण पत्र व प्रशस्ति पत्र मिलता है जो उनकी कार्यशैली को कहीं ना कहीं परिभाषित करता है। अभी हाल ही में कायाकल्प व एनक्यूआस ओटी एसेसमेंट में उनका कार्य बहुत ही सराहनीय है।उन्होंने बताया कि कोरोना काल में जब ओपीडी बाधित थी तब उन्होंने कई गरीब मरीजों व प्रवासी  मजदूरों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की ।और उन्हंी निशुल्क सैनिटाइजर, मास्क साबुन व मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा किया।
उन्होंने बताया कि अस्पताल के सभी डॉक्टर व  नर्सें उनके सरल सहज व मृदुभाषी व्यवहार की सराहना करते हैं और उनके सेवा भाव को सलाम करते हैं। उर्वशी ने बताया कि उनके पति व बच्चों ने हमेशा अपना सहयोग प्रदान किया ।तभी वह देर रात तक काम करती रहीं और अब तक जो भी उपलब्धि उन्हें मिली है  इसमें उनके परिवार की प्रमुख भूमिका है। उन्होंने कहा प्रत्येक महिला को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और सशक्त बनकर अपने अपने स्तर से समाज की सेवा करनी चाहिए।
उत्कृष्ट कार्य करने के लिए मिले प्रशस्ति पत्र
माध्यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट व कर्मचारी संघ वेलफेयर एसोसिएशन ने राज्य स्तर पर उनके द्वारा करोना काल में स्वास्थ्य सेवाएं व कम्युनिटी किचन सहयोग के लिए दीया प्रशस्ति पत्र।  प्रमुख रूप से कायाकल्प, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम ,रेड क्रॉस सोसाइटी, बेस्ट डिपार्टमेंट ऑफ द ईयर ऑपरेशन थिएटर, उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक  पुरुष अस्पताल एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा प्रदान किए गए।

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