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विश्व क्षयरोग दिवस (24 मार्च ) पर विशेष दर्जनों टीबी मरीजों को स्वस्थ बना चुकी हैं -माधुरी

उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता
दिव्यांगता को नहीं आने दिया आड़े, डॉट्स प्रोवाइडर बन दिला रहीं टीबी से मुक्ति 

कानपुर:खुद दिव्यांगता  का शिकार हुई माधुरी ने जब टीबी को देश से मिटाने की ठानी तब डॉट्स प्रोवाइडर बन गयीं और आज कई टीबी रोगियों को टीबी से मुक्त करवा चुकी हैं। पिता की मौत के बाद मानो जैसे माधुरी के ऊपर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा। उसके बाद घर की छत से गिरी तो रीढ़ की हड्डी टूटने की वजह से दिव्यांगता  का शिकार हो गयीं।  घर के हालात सुधारने के लिये उन्हें पडोसी ने स्टाफ नर्स बनने के लिये प्रेरित किया और फिर बाद में कमलापत मेमोरियल चिकित्सालय में वह डॉट्स प्रोवाइडर के रूप में कार्यरत हुईं। तभी माधुरी ने गहराई से क्षयरोग की जानकारी ली और फिर लोगों को भी टीबी से मुक्ति दिलाने की ठान ली। माधुरी अब तक दर्जनों लोगों को टीबी से मुक्ति दिलाने में मदद कर चुकी हैं। 
माधुरी ऐसे बनीं डॉट्स प्रोवाइडर
जनपद के शहरी क्षेत्र हूलागंज की रहने वाली माधुरी वर्ष 2004 से डॉट्स प्रोवाइडर के रूप में काम कर रही हैं| वह बताती हैं कि उनके घर पर माँ और दो भाई हैं। उनके मोहल्ले में ही एक परिवार के पांच  सदस्यों को टीबी हुई तब उन्होंने अन्य लोगों में उस परिवार के प्रति भेदभाव की भावना देखी । वह कहती हैं कि जब उन्हें डॉट्स प्रोवाइडर के रूप में कार्य करने का मौका मिला तो हाँ कहने में देर नहीं की| वह बताती हैं यहाँ ज्यादातर टीबी के मरीज़ मजदूर वर्ग के हैं| सुबह जल्दी काम के लिए निकल जाते हैं। इस वजह से वह सुबह छह  बजे उठ कर लोगों के पास जा कर दवाई देती हैं| जिन मरीजों से फ़ोन पर संपर्क होता है उनसे एक हफ्ता पहले ही संपर्क कर लेती हैं और दवाई खत्म होने से पहले ही दवा उपलब्ध कराती हैं|माधुरी बताती हैं कि कई मरीज़ किशोरियां भी रहीं हैं, जिनकी वह नियमित देख-रेख करती थीं। अक्सर उनके परिवार वालों को अपनी पहचान बताने में आपत्ति रहती थी| उन्हें डर रहता था कि यदि उनकी बेटियों के टीबी मरीज़ होने की बात लोगों में पहुंची तो ऐसा न हो शादी या आने वाले वैवाहिक जीवन में असर डाले| इसके लिए माधुरी ने परिवार वालों का भरोसा जीता और बिना पहचान बताये किशोरियों का इलाज पूरा करवाया और आज उन्हें टीबी से मुक्ति मिल गई है| अब तक माधुरी ने करीब 75 मरीजों को टीबी से मुक्ति दिलाने में मदद की है |जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.एपी मिश्रा ने बताया  फ़िलहाल जनपद में जनवरी 2020 से अब तक कुल 18,958 टीबी रोगी नोटिफाई  किए जा चुके हैं। इनके इलाज की सफलता दर 80 फीसदी रही। जिले में वर्ष 2020 में कुल 5474  टीबी रोगियों को निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह की रकम उनके खाते में दी जा चुकी है।उन्होंने बताया -  जिले में सभी डॉट्स प्रोवाइडर अच्छा कार्य कर रहे हैं, अलग-अलग श्रेणी के टीबी मरीजों को दवा खिलाने के एवज में डॉट्स प्रोवाइडर को शासन की तरफ से प्रोत्साहन राशि मिलती है| छह माह का कोर्स कराने पर एक हज़ार रुपये और एमडीआर टीबी के मरीजों, जिनका इलाज 24 माह चलता है, उन्हें दवा खिलाने पर डॉट्स प्रोवाइडर को पांच हजार रुपये मिलते हैं।

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