
उत्तरप्रदेश न्यूज़21 संवाददाता औरैया। जनपद में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी संवेदनहीन हो गए हैं तभी तो नेत्र से दिव्यांग महिला की विवशता उन्हें दिख नहीं रही। सात माह से दौड़ रही दिव्यांग महिला मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय में फरियादें सुन रहीं उप जिलाधिकारी के सामने रो सी पड़ी और बोली साहब मैं पिछले सात माह से लगातार दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चक्कर काट रही हूं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा साहब..। आप ही कुछ कर दो कि में प्रमाण पत्र बन जाए। मेरी मदद कर दीजिए साहब..। यह दिव्यांग महिला है विकास खंड अछल्दा के मोहम्मदाबाद गांव की माधुरी देवी। उसका गांव मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर है जहां से वह बार-बार प्रमाण पत्र बनवाने के लिये चक्कर लगा रही है। आज भी माधुरी तीस किलोमीटर की यात्रा कर जिलाधिकारी के पास पहुंची थी दिव्यागों की मदद करने के लिये सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना का हकीकत में कितना अमल हो रहा है यह बताने के लिये जीता जागता उदाहरण है विकास खंड अछल्दा के ग्राम मोहम्मदाबाद निवासी माधुरी देवी। आंखो में अंधेरा छाया है जिससे सरकार द्वारा दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए सात महीने से सीएमओ कार्यालय में चक्कर काट रही हैं। कार्यालय के चक्कर काट के थक चुकी दिव्यांग माधुरी अपने पति सतेंद्र के साथ मंगलवार को कलेक्ट्रेट में डीएम से गुहार लगाने पहुंची। कहा कि साहब दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवा दो। डीएम की अनुपस्थिति में शिकायतें सुन रहीं अतिरिक्त उपजिलाधिकारी विजेता ने इसको लेकर सीएमओ से फोन पर बात कर उनकी मदद करने के कहा। इसके बाद दंपती वहां से चला गया। इज्जतघर और आवास का भी नहीं मिल सका है लाभ
बातचीत में दिव्यांग माधुरी देवी ने बताया कि आठ साल पहले मेरी शादी हुई थी। दो बच्चे भी हैं। लेकिन अब तक हमें आवास और इज्जतघर का भी लाभ नहीं मिल सका है। इसको लेकर ग्राम प्रधान रामचंद्र से कई बार कहा लेकिन इसका लाभ नहीं मिल सका है। बोर्ड में नहीं हैं आंख के डॉक्टर
अभी तक अपने जिले में बोर्ड में आंख के डॉक्टर नहीं थे अब कन्नौज से चिकित्सक 15 दिन नें एक बार आते हैं। उस दिन दिव्यांग दंपती आ जाए उनका काम हो जाएगा।
डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ
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