नई दिल्ली: एक तरफ देश में कोरोनावायरस की बीमारी का खतरा थोड़ा कम होता है नजर आ रहा है तो दूसरी तरफ डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और सर्दी खांसी वाले वायरल बुखार का मौसम आ गया है। ऐसे में कोरोना और दूसरे बुखार के बीच फर्क कैसे किया जाए और इनका इलाज कैसे हो, उसके लिए केंद्र ने सभी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।बड़ी बात ये है कि सरकार ने ये माना है कि फ्लू और डेंगू जैसी बीमारियों के साथ अगर कोरोनावायरस होता है तो डॉक्टरों के लिए इलाज एक बड़ी चुनौती होगी। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल लिया गया। कोरोनावायरस और स्वाइन फ्लू के टेस्ट के लिए नाक या गले से सैंपल लिया जाए।
कोरोना रोगियों की संख्या अब तेजी से घटी
भारत में कोरोना के रोगियों की संख्या अब तेजी से घट रही है। जाहिर है कि ऐसे में सरकार ये बिल्कुल नहीं चाहेगी कि मौसमी बीमारियां कोरोना के सुधरते ग्राफ को बिगाड़ दें। पांच सप्ताह से भारत में कोरोना के आंकड़ों में सुधार है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार 9 से 15 सितंबर वाले सप्ताह में औसतन 92830 प्रति दिन था। 16 से 22 सितंबर वाले सप्ताह में ये घटती हुई 90346 प्रतिदिन आ गई। 23 से 29 सितंबर वाले सप्ताह में ये औसत तेजी से दिन और 83232 प्रति दिन आ गए। दोनों किनारों में मरीजों के घटने का सिलसिला और तेज हुआ।30 सितंबर से 6 अक्टूबर वाले सप्ताह में 77113 प्रतिदिन और 7 अक्टूबर से 13 अक्टूबर के बीच कोरोना रोगियों की संख्या औसतन 72576 प्रतिदिन पर आ गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना था कि पिछले सात दिनों में केवल दक्षिण पूर्व एशिया में कोरोनावायरस के मामलों में कमी आई है और इसकी वजह यह है कि भारत में कोरोना वायरस में आया है।
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