उत्तर प्रदेश न्यूज21ऑल इंडिया प्रेस एसोशिएशन
नई दिल्ली:आने वाले दिनों में यदि पराली को जलाए जाने या अन्य कारकों से प्रदूषण ठीक उसी तरह फैला, जैसा कि विगत में होता रहा है, तब इस बार स्थिति विनाशक होगी। कोरोना पहले ही सांसों का दुश्मन बना हुआ है। जानें जा रही हैं। उस पर प्रदूषण से स्थिति भयावह बन बैठेगी। जीवन पर दोहरी मार पड़ेगी। विशेषज्ञों ने इसे लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आशंका है कि कोरोना, पीएम 2.5 और शीतकाल का दुर्योग जानलेवा बन सकता है।
उत्तर भारत के मैदानी भागों में कुछ दिनों में ही धान की कटाई प्रारंभ हो जाएगी। यदि इस बार भी खेतों में पराली को जलाया गया, तो हर बार की तरह दिल्ली, उप्र, हरियाणा, पंजाब, मप्र सहित भारत का बड़ा भूभाग संकट में घिर जाएगा। वहीं, दिल्ली यदि इस बार भी 'गैस चैंबर' बनी तो हाहाकार मच सकता है। उधर, पंजाब-हरियाणा के आंदोलनकारी किसानों ने चेतावनी दे रखी है कि वे पराली जलाकर विरोध करेंगे। ऐसा कर वे अपने साथ ही दूसरों के जीवन को खतरे में डालने का ही काम करेंगे। खुद मरेंगे और दूसरों को मारेंगे। लिहाजा, इसे हरहाल में रोकना होगा। क्योंकि जान है तो ही जहान है।संकट केवल पराली से ही नहीं है, छोटे-बड़े शहरों में तमाम कल-कारखाने काम कर रहे हैं। सड़क परिवहन भी पूरी तरह सक्रिय है। ये भी प्रदूषण के बड़े कारक हैं। इसके अलावा, सड़कों और कच्चे फुटपाथों से उड़ने वाली धूल के कण शीतकाल में पर्याप्त ऊंचाई पर जमा हो जाते हैं और सांसों में पहुंच स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। इससे भी बचाव आवश्यक है। अतः ऐसे हर संभावित खतरे और कारकों के प्रति जनता, शासन-प्रशासन और सरकार को समय रहते सचेत हो जाना है। ताकि प्रदूषण प्रलय न लाने पाए। सभी को मिलकर जतन करना होगा। ताकि सामने खड़ी चुनौती पर समय रहते काबू पा लिया जाए। किसकी क्या जिम्मेदारी है, यह तय कर लेना होगा। ताकि सुनिश्चित हो सके कि प्रदूषण को नहीं फैलने दिया जाएगा। तुरंत कमर कस लेना है। क्योंकि यही सही समय है। बाद में देर हो जाएगी। पछताने के सिवा कुछ हाथ नहीं लगेगा।
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