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हमारे देश में स्त्रियों पर सबसे ज्यादा होते हैं अत्याचार




*ब्यूरो चीफ सौरभ त्यागी जालौन की कलम से*


*पत्नी को अर्धांगिनी कहा जाता है*

भारत में पत्नी के रूप में नारी की प्रतिष्ठा रही है  क्योंकि शादी के बाद  लड़की  अपना सारा घर संसार छोड़कर  अपने पति के साथ आ जाती है  और उसे उम्मीद रहती है कि  उसका पति  उसके पिता की तरह ही उसके सुख दुख में साथ रहेगा और जीवन भर खुश रखेगा ।
*भारत में पत्नी को गृह लक्ष्मी की संज्ञा दी गई है*
हमारे यहां  पत्नि को गृह लक्ष्मी की संज्ञा से संबोधित किया गया है पत्नी को पुरुष के अर्धांगिनी धर्मपत्नी भी कहा जाता है ।बताया जाता है कि पत्नी के अभाव में पति द्वारा किए गए धार्मिक कार्यो को निष्फल माना जाता है । विवाह के बाद पति  का पत्नी पर पूरा हक हो जाता है। अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी पत्नी का भरण पोषण करेगा उसे प्रेम करेगा उसे संरक्षण प्रदान करेगा। भारत में पति के लिए भरतार शब्द का प्रयोग किया गया है जिसका अर्थ है भरण पोषण करने वाला माना जाता है ।
*जब पत्नियों पर अत्याचार होते हैं तब मन दुखी होता है*

शादी के कुछ दिनों बाद ही घर में नारी के लिए सुरक्षा एवं प्रसन्नता की दृष्टि से अनदेखा कर अनेक स्त्रियों के प्रति घर में हिंसा का व्यवहार किया जाता है उन्हें लातों घूशो लकड़ियों से भी मारा जाता है हड्डियां तक तोड़ दी जाते हैं लेकिन अपने एक अध्ययन में पाया गया है कि पति द्वारा अपनी पत्नियों को चाकू से गोदा गया फर्नीचर फेंक कर मारा गया सीढ़ियों से गिराया गया तथा कुछ स्त्रियों के पैर में किले तक ठोकी जाती है ऐसा व्यवहार देखकर रूह कांप जाती है।


*भारत में  दहेज  सबसे बड़ा अभिशाप* 

दहेज हत्या

भारत में दहेज एक गंभीर समस्या बनी हुई है दहेज के अभाव में भारत में हजारों स्त्रियों को प्रतिवर्ष जलाया जाता है या मौत के घाट उतारा जाता है कुछ आत्महत्या कर लेती हैं कुछ इससे कठोर संघर्ष करके बच जाते हैं उन्हें सास व देवर जेठ पति व ससुराल पक्ष वालों के द्वारा कई प्रकार की यातनाएं दी जाती है उन्हें भूखा रखा जाता है अपने पीहर वालों में से पैसा मांगने के लिए तंग किया जाता है तथा यहां तक की आत्महत्या करने एवं घर छोड़कर चले जाने तक के लिए मजबूर किया जाता है जिससे कि पति द्वारा दूसरी शादी करके दहेज जुटा सके 1961 में भारत सरकार ने दहेज निरोधक अधिनियम बनाया  था जिसके अंतर्गत दहेज लेना व दहेज देना दोनों ही अपराध माने जाने लगे थे लेकिन कुछ समय बाद दहेज का एक ऐसा कहर बनकर टूटा की समाज में यह एक कैंसर की तरह बढ़ता चला गया जिसकी शिकार कई महिलाएं कई पुरुष इस दहेज संबंधी मुकदमे की नाव में फंस गए हजारों हत्या दहेज के कारण होती हैं जोकि दहेज संबंधी हत्या लड़की की ससुराल में ही होती ससुराल वाले प्रमाण मिटा देते हैं उसे आत्महत्या हादसे का रूप दे देते हैं साक्ष्य के अभाव में अपराधी अक्सर बच जाते हैं दहेज में उत्पीड़न 70 परसेंट महिला 21 से 24 वर्ष की आयु ऐसे होती हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए यह लगता है कि देश में स्त्रियां आज भी सुरक्षित नहीं है जबकि हमारे भारत देश में स्त्रियों के प्रति कितने कानून बनाए गए हैं कितनी संस्थाएं हैं जो जागरूक कर रहे हैं और महिलाओं को आगे लाने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं।

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 महिलाओं के प्रति देश का नजरिया

 

*आज देश में आगे हुई महिलाएं*

 हमारे देश में महिलाओं को हमेशा से घर में रहकर गृह कार्य करने के लिए रखा गया था लेकिन आजकल हमारे देश की महिलाएं हर जगह आगे आकर कामयाबी हासिल कर रही हैं और बड़े-बड़े मेडल जीतकर विदेशों में नाम रोशन कर रही है। 

*ग्रामीण क्षेत्र से महिलाओं ने बढ़ाया कदम*

 कुछ समय पहले ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बाहर निकलने से भी कतराते थे अपने घर के अंदर रहकर ही उसी को पूरी जिंदगी मानकर रहती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है देश में जागरूकता बढ़ी है उसके साथ साथी ग्रामीण अंचल क्षेत्र की महिलाएं भी साक्षर हुई है और आगे आकर अपना नाम कई रिकॉर्ड में दर्ज करा कर खिताब अपने नाम किए हैं।

*साक्षर हुई महिलाएं*

 हमारे देश में कुछ समय पहले महिलाओं को शिक्षा प्रदान नहीं होती थी जिसके कारण उनकी मानसिकता है इतनी कमजोर हो गई थी कि वह अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकती थी लेकिन आजकल देश में बदलाव शुरू हुआ है और महिलाएं साक्षर हुई हैं और हर क्षेत्र में आगे निकल कर आए हैं कई महिलाएं डिप्टी कलेक्टर एसपी मंत्री और मुख्यमंत्री भी बनी है जिससे पीछे रह रही महिलाओं मैं भी कुछ करने की चेष्टा जागी है और वह भी अपने आपको साक्षर कर  आगे बढ़ा रही हैं।

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