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यूपी में नहीं होगा हुक्का बार, हाईकोर्ट ने लगाई रोक ये सख्त टिप्पणियां।

लखनऊ विश्वविद्यालय में लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश के लगभग हर जिले में बड़ी संख्या में हुक्का बार चल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश न्यूज 21
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश) में रेस्टोरेंट, कैफे और अन्य स्थानों पर होने वाले हुक्के बार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोरोनावायरस (कोरोनावायरस) के संक्रमण के कारण बंद करने का आदेश दिया है। ये आदेश जस्टिस शशिकांत गुप्ता और जस्टिस शमीम अहमद की खंडपीठ ने लखनऊ विश्वविद्यालय के एलएलबी छात्र हरगोविंद पांडेय के पत्र पर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिए।
यूपी में तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण

हाई कोर्ट ने कहा है कि प्रदेश में कोरोनावायरस तेजी से फैल रहा है। हर दिन कोरोनार्टों की संख्या बढ़ रही है। हाई कोर्ट ने इसके फैलाव को रोकने के लिए मुख्य सचिव को रोड मैप तैयार करने का निर्देश दिया है और टिप्पणी भी की है कि बिना लॉकडाउन के कोई मदद नहीं मिल रही है।कोर्ट ने कहा है कि लॉकडाउन और तमाम कड़े उपायों के बावजूद कोरोना जंगल की आग की तरह फैलता जा रहा है। ये मानव जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है। हम घने अंधेरे में जंगल के बीच खड़े हैं। कल क्या होगा, इसका पता नहीं है। अगर रेस्टोरेंट और कैफे में हुक्का बार पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो कोरोना सामुदायिक संक्रमण का रूप ले लेगा।

रेस्टोरेंट और कैफे में हुक्का बार चलाने की अनुमति नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह किसी भी रेस्तरां और कैफे में हुक्का बार चलाने की अनुमति नहीं दें। कोर्ट ने मुख्य सचिव से 30 सितंबर तक इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है।इसके अलावा महानगरीयक को आदेश की दिशा में मुख्य सचिव और राज्य के सभी जिला प्राधिकरणों के अनुपालन के लिए प्रेषक का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने एडवोकेट विनायक मित्तल को जनहित याचिका पर पक्ष रखने के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया है। गौरतलब है कि लखनऊ विश्वविद्यालय में लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र हरगोविंद दुबे ने हाई कोर्ट को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि राज्य के लगभग हर जिले में बड़ी संख्या में हुक्का बार चल रहे हैं। हुक्का बार से कोरोनावायरस संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका है।अदालत ने इस पत्र का संज्ञान के बारे में ये निर्णय सुनाया है।

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