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सहार (औरैया)
मामला ग्राम पंचायत पुरवा खुते मदारी का
की प्रधान विमला देवी के द्वारा मनरेगा के मजदूरों की समस्या को बिल्कुल ही नजर अंदाज कर दिया गया है मनरेगा के मजदूर उनके घर के बार बार पैसे की आस में लगाते है चक्कर मजदूरों की समस्या को किया जा रहा है बिल्कुल से ही नजर अंदाज
दरासल मामला ये है कि ग्राम पंचायत पुरवा खूते मन्दारी के मजदूरों के द्वारा मनरेगा में आज से 4 महीने पहले बहुत ही उम्मीद और आस के साथ काम की सुरुआत की गई थी कि घर का खर्चा चलेगा लेकिन उनको क्या पता था कि मेरे साथ किया जा रहा है धोखा और मजाक
मजदूरों से कडकती धूप में काम तो ले लिया गया लेकिन उनको किसी भी प्रकार से मेहनत का पैसा नही दिया गया
मजदूरों की माने तो काम के वक्त उनसे बोला गया था कि 15 दिन में पैसे सभी के खातों में पहुचाने के लिए बोला गया था इसके बावजूद अभी तक नही पहुचा
मजदूरों ने बताया कि काम के समय भी लोगो की सूची में कई जाती थी धांधली जहाँ 50 लोग काम करते होते थे वही पर 70 लोगो के नाम सूची में किये जाते थे सामिल
मनरेगा मजदूरों का कहना है कि जब प्रधान विमला देवी के यहाँ हम सब जाते है तो उनके घर का दरवाजा ही नही खोला जाता और जब खुलता भी है तो बोल दिया जाता है ये काम मेरा नही है जबकि शाशन के द्वारा ग्राम पंचायत के प्रधान को चयनित करने का मुख्य उद्देश्य अनपढ़ ,अशाह, मजदुर तक सभी योजनाओं का लाभ पहुचना साथ ही साथ कार्यो को करने में आने वाली बाधा को दूर करना है
मजदूरों ने बताया कि प्रधान पुत्र संदीप गुप्ता ही पूरा कार्य सम्भालते है और उनसे बोलने पर मजदूरों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है
जहाँनरेगा योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले मजदूरों को
चार माह बीत जाने के बाद भी नही मिला भुगतान
आखिर प्रवासी मजदूर किससे कहे अपनी पीड़ा
प्रधान विमला देवी के दरवाजे के चक्कर लगा रहे मजदूर
मजदूरों की पीड़ा से प्रधान को नही कोई मतलब
आखिर कैसे चलेगी मजदूरों की रोटी
मजदूरों की पीड़ा देखकर भी मामले से अन्जान बने अधिकारी
ऐसे कैसे आत्मनिर्भर बनेगा भारत
उत्तर प्रदेश न्यूज़ 21 सहार
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