कोरोना महामारी ने देश और दुनिया को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया है। इकोनॉमी से लेकर मनुष्य मनुष्य के बीच संबंधों पर भी कोरोना वायरस का गहरा असर दिखाई दे रहा है। परंतु कोरोनाकाल में सबसे अधिक जिसका नुकसान हुआ है, वह शिक्षा का हुआ है। पिछले चार, साढ़े चार महीने से स्कूल-कालेज बंद हैं। ये स्कूल-कालेज कब तक खुलेंगे, अभी कुछ निश्चित नहीं है। सरकार की योजना है कि सितंबर में स्कूल-कालेज खोल जाएं। परंतु ये स्कूल-कालेज किस तरह खोले जाएंगे और इनके नियम-कानून क्या रहेंगे, अभी इसकी कोई सूचना किसी के पास नहीं है। स्कूल बंद है, पर स्कूलों द्वारा फीस वसूली जा रही है। बंद स्कूलों के माहौल के बीच ऑनलाइन एजूकेशन की शुरुआत हुई है। शिक्षाजगत में यह एक नया तिकड़म है और इसके तमाम बुरे असर देखने को मिल रहे हैं।
कोरोना ने शिक्षा की वाट लगा रखी है। स्कूल-कालेज बंद हैं, जिससे छात्रें की पढ़ाई रुकी पड़ी है। कोरोनाकाल के दौरान लॉकडाउन में तो मन मार कर बच्चे घर में बंद रहे, पर अब जब लॉकडाउन खुल गया है, तब भी स्कूल बंद हैं। इसलिए पढ़ाई पर तो अभी भी लॉकडाउन लगा है। लॉकडाउन खुलते ही स्कूलों ने ऑनलाइन एजूकेशन शुरू कर दिया है और जिस छात्र की फीस जमा करा दी गई, उसे ऑनलाइन का पासवर्ड दे दिया। इसका नतीजा क्या निकला, स्कूलों में रोज लड़ाई-झगड़े हो रहे हैं। कोरोना की वजह से देश भर में लोगों के रोजी-रोजगार बंद पड़े हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों की फीस समय से नहीं जमा कर पा रहे हैं। परिणामस्वरूप स्कूलों के मैनेजमेंट और अभिभावकों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस मुद्दे पर राज्य की सरकारे हरकत में आईं और स्कूलोे के फीस वसूलने पर रोक लगा दी। उसके बाद हाईकोर्ट

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