पूछते हो तुम मुझसे क्यों इतना इश्क उंडेलते हो
किस के लिए ये तरन्नुम , ये नग़मे छेड़ते हो , कौन है वो जिसपे तुम मरते हो ,
क्या तुम किसी से प्यार करते हो , कभी कहते हो इश्क की कहानियां तो कभी
दर्दे - दिल बयां करते हो , क्या कोई दे गया दग़ा या किसी का इंतजार करते हो ।
किस तरह बताऊं तुम्हें तुम ही मेरे अज़ीज़ हो , एक तुम ही तो हो जो मेरे दिल के करीब हो,
इक बार पढ़ लो मेरी आंखों की भाषा तो समझ जाओगे , कितना प्यार है हमें तुमसे
ये जान जाओगे , तुम्हीं हो आशिकी मेरी , तुम्हीं मेरा इश्क हो , तुम्हीं मेरी दुआ , पूजा ,
तुम्हीं मेरे खुदा हो , तुम रहते हमेशा मुझे में , मुझसे तुम कहां जुदा हो ।
करते हैं बेइंतहा प्यार तुमसे , कैसे तुम्हें बताएं हम , हया ने रोका हमें , ज़माने ने टोका
हमें , इक इशारा जो कर दो तुम तो सिमट जाएं तुम्हारी बांहों में , बिछा दें खुद को
तुम्हारी राहों में ।
लिखते हैं ग़ज़लें हम तुम्हारी ही चाह में , आंखों में बसाते हैं ख़्वाब तुम्हारे ,
दिल में रखते हैं अरमान तुम्हारे , यूं पूछा ना करो जानम कि किस के ख़्यालों
में हम रहते हैं , हम तो बस तुम्हीं को चाहते हैं , हां सिर्फ तुम्हीं को चाहते हैं।
मौलिक एवं स्वरचित
प्रेम बजाज जगाधरी, ( यमुनानगर )

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