उत्तर प्रदेश न्यूज21
माध्यमिक कॉलेजों में आनलाइन और स्वयंप्रभा चैनल के माध्यम से पढ़ाई शुरू हो गयी है। परिषदीय विद्यालयों में भी आनलाइन पढ़ाई पर जोर है। शिक्षा विभाग की ओर से जो सर्वे कराया गया है, उसके अनुसार ग्रामीण इलाकों में 10-12 फीसदी बच्चों के घरों में एंड्रॉयड फोन है न टीवी है। यह बच्चे कैसे मोबाइल या स्वयंप्रभा चैनल से पढ़ाई करेंगे।
माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए आनलाइन और स्वयंप्रभा चैनल के माध्यम से पढ़ाई शुरू हो गयी है। मगर ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र ऐसे हैं, जिनके घरों में न तो टीवी है और न ही एंड्रायड फोन है। साथ ही बाजारों में नए पाठ्यक्रम के अनुसार किताबें अभी तक उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। ऐसे में छात्र आनलाइन या घर में पढ़ाई कर पाने में पूरी तरह से तैयार नहीं है। परिषदीय स्तर पर छात्रों को आनलाइन शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मगर आनलाइन शिक्षा के लिए ग्रामीण छात्रों के पास संसाधनों की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बबाइन के शिक्षक अखिलेश कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि उनके विद्यालय में पंजीकृत अधिकांश बच्चे ऐसे हैं, जिनके घरों में एंड्रायड फोन की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आनलाइन शिक्षा से बच्चों को जोड़कर पढ़ाई कराना एक बड़ी समस्या है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय भूरेपुर के शिक्षक अरविंद दुबे ने भी बच्चों के घरों पर एंड्रायड फोन न होने से आनलाइन शिक्षा सही तरह से संचालित न हो पाने की बात बतायी है। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को एक एक बिंदु पर कई बार समझाने की जरूरत रहती है। ऐसे में आनलाइन प्रक्रिया से पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराना महज औपचारिकता ही हो सकती है। उधर माध्यमिक स्तर पर जनसहयोगी इंटर कॉलेज अमावता के शिक्षक साध्येश सिंह सेंगर, शिव इंटर कॉलेज हैदरपुर के शिक्षक अवधेश कुमार शर्मा का कहना है कि छात्रों के पास संसाधनों की कमी और बाजार में अभी तक पुस्तकों की उपलब्धता न हो पाना एक बड़ी समस्या है। ऐसे में छात्रों की विधिवत रूप से पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
आदर्श इंटर कॉलेज अछल्दा के प्रधानाचार्य सुशील कुमार तिवारी का कहना है कि शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित होकर ज्यादा से ज्यादा छात्रों को आनलाइन शिक्षा से जोड़ने का प्रयास करते हैं। मगर कई छात्र ऐसे हैं जिनकें घरों पर एंड्रॉयड फोन नहीं है। जब अभिभावकों से शिक्षा की आनलाइन प्रक्रिया से जुड़ने के लिए एंड्रॉयड फोन की व्यवस्था कराने की बात कही जाती है तो वह असमर्थता जताकर किनारा कर लेते हैं। ऐसे में सभी बच्चों को शासन की मंशा के अनुरूप शिक्षा की सुविधा मुहैया कराना क ठिन हो गया है। परिषदीय बच्चों को अभी तक किताबों की व्यवस्था नहीं करायी जा सकी है। ऐसे में बच्चे घर पर भी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।
50 फीसदी बच्चों को भी नहीं मिल रहा शिक्षा का लाभ
औरैया। परिषदीय बच्चों के लिए आनलाइन शिक्षा की जो प्रक्रिया शुरू करायी गयी है उसमें आधे बच्चों को भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। और जो कुछ बच्चे
आनलाइन शिक्षा की प्रक्रिया से जुड़े हैं उनमें भी सभी छात्र नियमित रूप से शिक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कहीं मोबाइल नेटवर्क की समस्या तो कही और समस्याएं शिक्षा में बाधक बनी रहती है। शिक्षक भी आनलाइन शिक्षा को लेकर औपचारिकता पूरी करते नजर आ रहे हैं।
आनलाइन शिक्षा की प्रक्रिया से जुड़े हैं उनमें भी सभी छात्र नियमित रूप से शिक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कहीं मोबाइल नेटवर्क की समस्या तो कही और समस्याएं शिक्षा में बाधक बनी रहती है। शिक्षक भी आनलाइन शिक्षा को लेकर औपचारिकता पूरी करते नजर आ रहे हैं।

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