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*आओ जश्न-ए-आज़ादी मनाते हैं हम।*
*इस आज़ादी का किस्सा सुनाते हैं हम।*
कितनी माताओं की गोद खूनी हुईं।
दर्द लाखों सहे, मुख से कुछ ना कहे,
उन पिताओं की करुणा सुनाते हैं हम।
*आओ जश्न- ए- आज़ादी मनाते हैं हम।*
*इस आज़ादी का किस्सा सुनाते हैं हम।*
गोलियां खाईं सीने में हॅंसते हुए,
दर्द झेला मगर आह निकली नहीं।
लेके झंडा तिरंगा वो लड़ते रहे,
दे दी कुर्बानी पर, सांसे मचलीं नहीं।
उस कुर्बानी पर मस्तक झुकाते हैं हम।
*आओ जश्न- ए- आज़ादी मनाते हैं हम।*
*इस आज़ादी का किस्सा सुनाते हैं हम।*
कितनी धंधकी थी ज्वालाएं ये जाने हम,
कैसे पाया ये दिन, इसको पहचानें हम,
अस्मिता भारती मां की धूमिल न हो,
मरके भी जान वीरों की बोझिल न हो।
इसलिए हिंद अपना सजाते हैं हम।
*आओ जश्न- ए- आज़ादी मनाते हैं हम।*
*इस आज़ादी का किस्सा सुनाते हैं हम।*
करके जय हिन्द आंचल में इसके पलें,
और हिमालय से रामेश्वरम तक चलें।
गोरमाता से सूरज के द्वारे तलक।
कर दो जयघोष, धरती हो, या हो फलक।
शौर्य अपना सभी को दिखाते हैं हम।
*आओ जश्न- ए- आज़ादी मनाते हैं हम।*
*इस आज़ादी का किस्सा सुनाते हैं हम।*
🇮🇳 *उपासना राजपूत*

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