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द्वापर में जन्म होने पर खुल गए थे कारागार के ताले, लेकिन कलियुग में 18 वर्षों से हैं जानिए

उत्तर प्रदेश न्यूज 21 रिपोर्ट अजितप्रतापसिंह

कानपुर देहात:जब हैरान कर देने वाली सच्चाई, जानकर आप ताज्जुब मानेंगे। जिनके जन्म होने पर कारागार के ताले खुद-ब-खुद खुल गए थे। द्वापर युग के वही महारथी श्रीकृष्ण आज खुद पुलिस की कैद में हैं। दरअसल जेल में बंदी मां देवकी से जन्मे श्रीकृष्ण द्वापर युग में तो पालनकर्ता मैया यशोदा के घर पहुंच गए, लेकिन इस कलियुग में आज भी कारागार में बंद हैं। दरअसल ये माखनचोरी की नहीं बल्कि बेगुनाही की सजा काट रहे हैं। जी हां ऐसा ही कानपुर देहात की शिवली कोतवाली में देखने को मिला, जहां श्रीकृष्ण भाई बलराम, राधा एवं लड्डू गोपाल के साथ कोतवाली के मालखाने में कैद हैं। 18 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अभी तक बेगुनाही की सजा भुगत रहे हैं।


बताया गया कि अठारह साल पहले कानपुर देहात के शिवली क्षेत्र में आलोक चतुर्वेदी के प्रसिद्ध राधाकृष्ण मंदिर से चोरों ने ये बेशकीमती मूर्तियां चोरी की थी। सक्रिय हुए कोतवाली प्रभारी गर्ग साहब ने चोरों को गिरफ्तार कर ये कीमती मूर्तियां बरामद कर ली थीं। कुछ समय पश्चात जमानत पर चोर तो रिहा हो गए, लेकिन द्वापर युग में जन्मे श्रीकृष्ण कलियुग के कानूनी दांव पेंच में फंसकर रह गए, जो आज भी कोतवाली के मालखाने में कैद हैं। हालांकि कोतवाली पुलिस प्रत्येक वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी पर बड़ी धूमधाम से उनका जन्मदिन मनाते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक शिवली कस्बे के प्राचीन राधाकृष्ण मंदिर से 12 मार्च 2002 को अष्टधातु निर्मित श्रीकृष्ण, राधा व बलराम की 3 बड़ी मूर्तियां एवं लडडू गोपाल व राधाजी की दो छोटी मूर्तियां चोरी हुई थीं। उस दौरान मंदिर के संरक्षक आलोक दत्त ने शिवली कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।


जिसके बाद पुलिस ने महज कुछ ही दिनों में चोरों को गिरफ्तार कर मूर्तियों को बरामद कर लिया था। बताया गया कि मूर्तियां पुनः स्थापित करने के लिए आलोक दत्त द्वारा कई बार कोतवाली व न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। तब से लेकर आज तक समूचे परिवार समेत श्रीकृष्ण मालखाने में ही कैद हैं। जन्माष्टमी पर कोतवाली स्टाफ मूर्तियों को मालखाने से बाहर निकालते हैं। स्नान कराने के बाद नवीन वस्त्र पहनाकर पूजन करते हैं और उनकी अनुकम्पा पाते हैं। शिवली कोतवाल ने बताया कि कानूनी पेंच के चलते मूर्तियों को रिलीज कर मंदिर में स्थापित नहीं कराया जा सका। आज भी उनके पूजन की तैयारी है। शाम को उनको बाहर निकालकर भोग लगाकर पूजन किया जाएगा।

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