उत्तरप्रदेश न्यूज़-21 संवाददाता
"रात का घुप्प अँधेरा था तभी हमें एक दो मंजिला घर की छत पर दो सिर दिखाई दिए. हमें लगा कि छत पर कुछ लोग हैं. मूवमेंट देखते ही हमने उस घर को घेरना चाहा. कुछ लोग आगे की ओर रहे और कुछ पीछे की ओर बढ़े. मैं अपने दो साथियों के साथ आगे की ओर था. हम कुछ कर पाते तभी बगल वाले घर से अचानक फायरिंग शुरू हो गई. बस आधे मिनट में ही हम पर बीसियों राउंड फायर कर दिए गए होंगे."
ये शब्द बिठूर के थानाध्यक्ष कौशलेंद्र प्रताप सिंह के हैं जिन पर विकास दुबे गैंग ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं.
सिंह के साथ-साथ उनके दो साथी भी इस घटना में गंभीर रूप से जख्मी हुए. लेकिन केपी सिंह ने अपने दो साथियों अजय सेंगर और अजय कश्यप की जान बचाई.
कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे गैंग के साथ मुठभेड़ को लेकर केपी सिंह अभी भी सोच में हैं कि जो कुछ हुआ, वो कैसे हुआ? उनके लिए अभी भी ये बात एक पहेली बनी हुई है कि आख़िर विकास दुबे गैंग ने इस तरह का कदम क्या सोचकर उठाया.
केपी सिंह ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए गुरुवार की रात का पूरा वाकया बताया.

إرسال تعليق
If You have any doubts, Please let me know