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अधिकारियों के अनदेखी की शिकार हुए महिला आज भी अपनी मूलभूत अधिकारों को लेकर विधवा दिव्यांग अधिकारियों की चौखट पर लगा रही चक्कर!

           राज त्रिपाठी उत्तर प्रदेश न्यूज21
कानपुर देहात:-तहसील रसूलाबाद के बहक पुरवा की महिला सावित्री आज भी हिम्मत नहीं हारी और विधवा सावित्री आँख व पैरों से दिव्यांग होने के बाद भी कहती है चाहे हमे अधिकारियों के चौखट पर ही क्यों न प्राण निकल जाएं पर हम अपने अधिकारों को लेकर ही रहेंगे
बहक पुरवा निवासी सावित्री ने बताया कि उसके पति एक पल्ले दारी का मेहनत मजदूरी किया करता था गरीबी के चलते उस हिसाब से खानपान नहीं हो पाता था कभी काम मिल गया तो खा लिया नहीं मिला तो बच्चों समेत भूखे पेट ही सो गए इसी तरह हम लोगों का दिनचर्या चलती रही गरीबी के चलते काम कभी न मिल पाने से मानसिक चिंता के कारण पति हरिश्चन्द्र सराब का भी लती हो गया जिससे वह बीमार पड़ गया इधर जैसे तैसे प्रधान ने तीस हजार की एक कालोनी दी थी जिसमे दस हजार प्रधान ने लेलिए थे बचे बीस हजार पांच हजार पति के इलाज में लगा दिए इसके बाद बचे पन्द्रह हजार जो मकान बनाने में जो पूरा वह भी नहीं बनपाया केवल दीवाले ही बन पाई उसमें भी आंधी आई एक दीवाल गिर गई इसके बाद बीमार पति भी मर गया सावित्री दिव्यांग होने के कारण मानों उसके आंखों में अंधेरा छा गया हो उसके सामने दुःख का पहाड़ ट्टू पड़ा हो वह किसी तरह घास फूस की झोपड़ी बना अपने दो बच्चों को लेकर उसी में रह रही है 
नहीं सोएगा गरीब भूखा पेट की हकीकत सरकार
लेकिन वास्तव में आज अपने पेट की भूख को मिटाने के लिए जब कोटेदारों के पास जाती है तो उसको भगा दिया जाता नहीं मिलेगा लाख डॉ उन के चलते किस तरह उसने अपना इधर उधर से जीवन काटा वहीं विधवा दिव्यांग सावित्री की एक पुत्री प्रियंका साड़ी के योग्य हो गई तो उसको और चिंता सताने लगी
विधवा दिव्यांग सावित्री के पास न तो राशनकार्ड ही है न उसको विधवा पेंशन और नहीं दिव्यांग पेंशन
सरकारी दावे उस वक़्त फेल हो जाते हैं जब सरकार के नुमाइंदों को यह जान कारी नहीं की हमारे क्षेत्र में कौन गरीब मर रहा जब सावित्री राशन कार्ड बनवाने तहसील आती है तो यहां से उसको भगा दिया जाता 
इस महिला को गरीबी भी देख गरीबी शर्मा जाती है

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