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कोरोना के मामलों से ध्‍यान भटकाने के तहत सीमा पर भारत को आंख दिखा रहा है चीन

कोरोना के मामलों से ध्‍यान भटकाने के तहत सीमा पर भारत को आंख दिखा रहा है चीन

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(उत्तरप्रदेश न्यूज़21)। उत्‍तराखंड से लगती चीन की सीमा पर जब से भारत ने सड़क बनाई है तब से ही चीन की आंखों में वो कांटे की तरह चुभ रही है। इस सड़क के उद्घाटन के बाद चीन ने भारतीय राजदूत को तलब कर अपना विरोध भी जताया। लेकिन चीन का ये रवैया न तो नया ही है और न ही ऐसा है जिसको पहली बार देखा जा रहा है। गर्बाधार-लिपुलेख सड़क के बनने से भारत की सामरिक ताकत बढ़ी है। इसके बाद चीन द्वारा के सैनिकों द्वारा दो बार भारतीय सीमा में घुसकर हाथापाई भी की गई। इसके बाद सवाल ये उठता है कि उसने ऐसी हरकत क्‍यों की जबकि भारत ने अपनी ही सीमा के अंदर सड़क निर्माण किया था।

इस तरह की कार्रवाई की सबसे बड़ी वजह तो ये ही है कि चीन हमेशा से ही अपनी विस्‍तारवादी नीति की अगुआई करता रहा है। चीन के अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद हैं। इसके अलावा ताईवान को लेकर भी उसका विवाद है और दक्षिण चीन सागर विवाद को भी पूरी दुनिया भलिभांति जानती है।

चीन की इस गीदड़ भभकी को जानकार अपने यहां के वर्तमान हालातों से लोगों का ध्‍यान भटकाना मानते हैं। चीन मामलों के जानकार और किंग्‍स कॉलेज, लंदन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत मानते हैं कि एक तरफ जहां पूरी दुनिया कोरोना के कहर से निकलने की कोशिश में जुटी है तो दूसरी तरफ चीन बड़ी तेजी से इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। ताइवान हो या दक्षिण चीन सागर सभी जगहों पर उसकी गतिविधियों और उसकी धमकियों में तेजी आई है। यही चीन भारत से लगती सीमा पर भी दिखाई दे रही है।

उनके मुताबिक सीमा पर जब भी कभी कोई सड़क बनाई जाती है तो प्रोटोकॉल का इस्‍तेमाल किया जाता है और पड़ोसी देश को उसकी पूर्व सूचना भी दी जाती है। हालांकि ये भी एक सच्‍चाई है कि इसको लेकर विरोधी देश हमेशा ही डिप्‍लोमेटिक माध्‍यम से अपना विरोध दर्ज कराता है। वहीं दूसरा देश अपना काम करता जाता है। जहां तक चीन की बात है तो वह बखूबी जानता है कि वर्तमान में जब उसके यहां पर कोरोना के मरीजों और इससे हुई मौतों की संख्‍या पर सवाल उठ रहे हैं तो ये जरूरी हो जाता है कि लोगों का और दुनिया का ध्‍यान यहां से भटकाया जाए। चीन फिलहाल वही कर रहा है।

उनका कहना है कि चीन इससे पहले डोकलाम में भी भारत को आंख दिखाने की कोशिश कर चुका है। सिक्किम और नागालैंड को भी वो अपना हिस्‍सा बताता रहा है और यहां पर होने वाले निर्माण का विरोध करता रहा है। प्रोफेसर पंत मानते हैं कि उसकी ये गीदड़ भभकी ज्‍यादा लंबे समय तक दिखाई नहीं देगी और वो खुद ही शांत भी हो जाएगा। लेकिन इसके बावजूद भारत को हर वक्‍त चीन से सतर्क रहने की जरूरत होगी। उनके मुताबिक चीन द्वारा की जा रही ये कवायद पीएलए का एजेंडा है और चीन हमेशा से ही इस तरह की गतिविधियों के लिए इसका इस्‍तेमाल करता रहा है।

उनके मुताबिक क्‍योंकि चीन-भारत के बीच कुछ सीमा पर वास्‍तव में जमीन पर कोई लकीर नहीं है इसकी वजह से भी कभी-कभी दोनों देशों के बीच गतिरोध की खबरें आती रहती हैं। उनका ये भी मानना है कि थोड़ा बहुत गतिरोध दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर तब तक चलता रहेगा जब तक ये सीमा का सही निर्धारण दोनों देशों की सहमति से नहीं हो जाता है। इसके बाद भी भारत को अपनी सीमा के अंदर हर तरह का निर्माण करने का अधिकार है।

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