राज त्रिपाठी /उत्तर प्रदेश न्यूज़21/कानपुर देहात
कस्वा रसूलाबाद में स्थिति धर्म गढ़ बाबा मंदिर परिषर में खड़े बट वृक्ष को विधिविधान के साथ नहला धुलाकर सात फेरे लगा आस्था के साथ सुहागिनों ने अपने पति की हरप्रकार से स्वस्थ व निरोगी दीर्घायु होने के लिए पूजा अर्चना की वहीं
सावित्री ने बताया के सबसे पहले हमारे धर्म ग्रंथों में प्रकृति ही मानव जीवन का एक अभिन्न साथ इससे इसकी सुरक्षा करना ही हम सबका प्रथम धर्म भी बनता है इसके अलावा बट बृक्ष में भगवान शिव का स्वरूप विद्धमान है जो ईश्वर अजन्मा व पालन कर्ता संरक्षण करता व विनास करता है इस लिए भगवान शिव लम्बी आयु के साथ अजन्मा हैं इस लिए भी पूजा अर्चना हम महिलाएं करती है
एक मान्यता यह भी है कि बट बृक्ष की पूजा कर सावित्री ने भी अपने पति सत्यवान के प्राण बचाये थे और अपने सास ससुर का खोया हुआ राज्य व दिब्य दृष्टि पाई थी
दूसरी मान्यता यह भी है कि माता कुंती के साथ अज्ञात वर्स में जंगलों में भ्रमण कर रहे थे तो बकोदर भीम को अधिक भूख लगने से व्याकुलता हो रही थी तो माता कुंती से भोजन के लिए आग्रह किया जिस पर माता कुंती ने बरगद के फल खाने के लिए कहा था तो उस समय भीम ने पूरा बृक्ष ही उखाड़ कर फल वाला हिस्सा अपने कंधों में आगे रख खाने लगे तो माता ने देखा तो कष्ट हुआ जिस पर भीम को डाटा फटकारा और वहैं उसी जगह लगा देने को कहा तो भीम ने उसको उल्टा गाड़ दिया और अपनी मात्र सेवा भाव की दुहाई देकर फिर से हरा हो जाने के लिए कहा जिससे वह बट बृक्ष अपने परिवार में मिल सका इस प्रकार धार्मिक मान्यताओं को मानते हुए प्रकृति से लेकर साकार निराकार व सगुण निर्गुण की उपासना कर अपना जीवन धन्य बनाती।
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