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कविता-मैं मैं हूँ............अनुराग सिंह सेंगर

उत्तर प्रदेश न्यूज़21(उत्तर प्रदेश)

मैं,मैं हूँ , 
चाहे जैसा भी हूँ.. 
खुद से ही खुश हूँ ,
चाहे कैसा भी हूँ..
न मैं अति सुन्दर न छरहरी,
ना ही नायिकाओ सी काया है मेरी..
पर खुद पे ही है नाज़,  
आत्मविश्वास और संबल ही 
 छाया है मेरी.. 
क्या करुँ क्या नहीं,  
अब नही करनी किसी की परवाह.. 
अब तो लगता है वही करुँ,
जो दिल मे दबा के रखी थी चाह..
बच्चे उड़ चुके या उड़ने वाले हैं, 
घोसलों से नई दिशाओं में..
हम भी चुनेगें अब अपने पसंद की जमीं, 
और आसमां नई आशाओं में..
अब अपने घोंसले को ही नही, 
खुद को भी सजाना है..
बहुत मनाया सबको,
अब खुद को भी मनाना है.. 
सूख चुकी उम्मीदों को, 
फिर से सींचना है..
रुठी हुई ख्वाहिशों को ,
गले लगा के भींचना है..
जीऊँगा जिंदगी को फिर से, 
अब नए उमंग मे.. 
लिए अपनी तमन्नाओं को , 
अपने संग में..
थाम हाथ में जुगनुओं को ,
फिर से खिलखिलाऊँगा.
 नए सफर को नई उम्मीदों की, 
रौशनी से जगमगाऊँगा 
फिर से बचपने के करीब हूँ, 
लिखूँगा फिर से अपनी ज़िन्दगी.. 
मैं अब खुद ही, अपना नसीब हूँ !!
मैं मैं हूँ .....हाँ....मैं बस मैं. हूँ.....

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