ब्यूरोचीफ:-सौरभ त्यागी जालौन उत्तर प्रदेश न्यूज़ 21
उरई : लॉक डाउन ने जहां एक तरफ जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया हैं वही दूसरी तरफ लोगों का बीमार होना इस मुश्किल घड़ी में घातक साबित हो सकता है। ऐसे हालातों में
जहां सरकारी स्वाथ्यकर्मी निडरता से अपनी सेवाएं दे रहे है तो कुछ निजी अस्पतालो में डॉक्टर्स की कमी खल रही है।
कोरोना संक्रमण के दौर में हर कोई अपने स्तर से एक दूसरे की मदद के लिए तत्पर दिखाई दे रहे हैं। ऐसे एक युवा समाजसेवी विशाल वर्मा (अध्यक्ष) आस्था समाज सेवा संस्थान ने महादान कर मिसाल कायम की है। उन्होंने बताया कि पड़ोस में रहने वाले युवक प्रदीप ने फोन के माध्यम से अवगत कराया कि रिश्तेदारी की 16 वर्षीय लड़की की हालात नाजुक हैं और वह स्वजनों के साथ जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आई हैं, डॉक्टर ने शरीर मे प्लेट्स घटने से खून की कमी होने की बात कही है। लड़की के परिजनों ने ब्लड बैंक में जाकर सम्बंधित ब्लड ग्रुप की जानकारी की तो उस ब्लड ग्रुप की संख्या मौजूदा में कम थी। ब्लड बैंक प्रभारी का कहना था कि लॉक डाउन होने की वजह से ब्लड डोनेट करने वालों की संख्या में कमी आई है। हालात नाजुक होने की वजह से जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने लड़की को मेडिकल ले जाने की बात कही। लेकिन उससे भी बात नही बनी तो एक निजी अस्पताल का सहारा मिला। वहां के डॉक्टर ने 2 यूनिट खून की जरूरत बताई। पड़ोसी ने परेशानी बताई तो इन हालातों में वह स्वयं ही खून देने के लिए तैयार हो गए। सोमवार देर शाम विशाल वर्मा ने बिना किसी स्वार्थ के एक अनजान लड़की को खून देकर उसकी जान बचाने का बीड़ा उठाया। साथ ही उन्होंने सन्देश दिया कि युवाओं की तत्परता और दूसरों की मदद करने की ललक जरूरतमंद के लिए कही न कही सहारा बन सकती हैं।
उरई : लॉक डाउन ने जहां एक तरफ जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया हैं वही दूसरी तरफ लोगों का बीमार होना इस मुश्किल घड़ी में घातक साबित हो सकता है। ऐसे हालातों में
जहां सरकारी स्वाथ्यकर्मी निडरता से अपनी सेवाएं दे रहे है तो कुछ निजी अस्पतालो में डॉक्टर्स की कमी खल रही है।
कोरोना संक्रमण के दौर में हर कोई अपने स्तर से एक दूसरे की मदद के लिए तत्पर दिखाई दे रहे हैं। ऐसे एक युवा समाजसेवी विशाल वर्मा (अध्यक्ष) आस्था समाज सेवा संस्थान ने महादान कर मिसाल कायम की है। उन्होंने बताया कि पड़ोस में रहने वाले युवक प्रदीप ने फोन के माध्यम से अवगत कराया कि रिश्तेदारी की 16 वर्षीय लड़की की हालात नाजुक हैं और वह स्वजनों के साथ जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आई हैं, डॉक्टर ने शरीर मे प्लेट्स घटने से खून की कमी होने की बात कही है। लड़की के परिजनों ने ब्लड बैंक में जाकर सम्बंधित ब्लड ग्रुप की जानकारी की तो उस ब्लड ग्रुप की संख्या मौजूदा में कम थी। ब्लड बैंक प्रभारी का कहना था कि लॉक डाउन होने की वजह से ब्लड डोनेट करने वालों की संख्या में कमी आई है। हालात नाजुक होने की वजह से जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने लड़की को मेडिकल ले जाने की बात कही। लेकिन उससे भी बात नही बनी तो एक निजी अस्पताल का सहारा मिला। वहां के डॉक्टर ने 2 यूनिट खून की जरूरत बताई। पड़ोसी ने परेशानी बताई तो इन हालातों में वह स्वयं ही खून देने के लिए तैयार हो गए। सोमवार देर शाम विशाल वर्मा ने बिना किसी स्वार्थ के एक अनजान लड़की को खून देकर उसकी जान बचाने का बीड़ा उठाया। साथ ही उन्होंने सन्देश दिया कि युवाओं की तत्परता और दूसरों की मदद करने की ललक जरूरतमंद के लिए कही न कही सहारा बन सकती हैं।

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