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देश के रक्षकों (पुलिस)और जान के रक्षकों (डॉक्टर) को समर्पित कविता।

समाचार संपादक-घनश्याम सिंह
औरैया:खाकी के सम्मान में,झुकता सिर बारम्बार।जनता की सेवा के लिए, छोड़ दिया घर-द्वार।
राशन पानी, सामान जरूरी, हम सब तक पहुँचाते हैं।कभी गौर से सोचा है, हम बदले में क्या देते हैं??*
मातृभूमि की रक्षा में, काँधे पर बंदूक लिए।कितनी घनघोर घटायें हों, होंठों पर मुस्कान लिए।गली मोहल्ले भटक रहे हैं, वो रक्षक सब सह लेते हैं।कभी गौर से सोचा है, हम बदले में क्या देते हैं??*रात-रात को जागकर, इधर से उधर भागकर,दिल में दया का भाव, मन में शांति और सद्भाव है।
जनता की भलाई के लिए, निज सुख को भी तज देते हैं।कभी गौर से सोचा है, हम बदले में क्या देते हैं??कोई उनको गालियाँ देता है, कुछ पत्थर फेंक मारते हैं।जिसकी सेवा में तत्पर हैं, उनसे ही जान बचाते हैं।
कर्तृव्य पथ पर चलते हुए, ये हरकत भी सह लेते हैं।कभी गौर से सोचा है, हम बदले में क्या देते हैं??क्यूँ भूल गए इस कलयुग में, भगवान वही कहलाते हैं।तुम थूक रहे उन देवों पर, जो तुमको "कोरोना" से बचाते हैं।और तुम्हें बचाने की ही खातिर, दिन-रात एक कर देते हैं।कभी गौर से सोचा है, हम बदले में क्या देते हैं??*जोखिम में अपने प्राण डाल अस्पतालों में समय बिताते हैं।तुम घर से बाहर ना जाओ,   विनती सबसे करते हैं।अच्छी बातों को ठुकराकर पर हठधर्मी वे करते हैं।कभी गौर से सोचा है, हम बदले में क्या देते हैं??*मार दिये गर दो डंडे, तो कौन सी आफत आई है।अपने घर में ही बैठोगे, इससे तुम्हारी ही तो भलाई है।जब फंस जाते हो इतर कहीं, वो फरिश्ते ही घर पहुँचाते हैं।*कभी गौर से सोचा है, हम बदले में क्या देते हैं??उन देशभक्त, उन वीरो का, आओ मिलकर  सम्मान करें।*
*वो सदा निरोग, निश्चिंत रहें, उस ईश्वर से गुणगान करें।हम लोगों के इस कर्म से शायद उनको तसल्ली मिल जाये।इस कोरोना से मुक्ति मिले, मेरा भारत फिर से खिल जाए।
उपासना राजपूतसहायक अध्यापक बेसिक शिक्षा परिषद उप्र

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