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कोरोना के कहर से बचाने को घर-घर हो रहीं प्रार्थनाएंविश्व व्यापी महामारी से बचाने को त्रिभाषी साहित्यकार घनश्याम सिंह ने अंग्रेजी में की स्वरचित प्रार्थना

कोरोना के कहर से बचाने को घर-घर हो रहीं प्रार्थनाएं
विश्व व्यापी महामारी से बचाने को त्रिभाषी साहित्यकार घनश्याम सिंह ने अंग्रेजी में की स्वरचित प्रार्थना
     
   औरैया: दुनियां को कोराना के कहर से बचाने के लिए जनपद में घर-घर प्रार्थनाएं की जा रही हैं,इस क्रम में ग्राम मनुआं पुरवा व पिपरौली शिव में विशेष प्रार्थनाएं की गईं।।
वैश्विक महामारी "कोराना" के कहर से दुनियां को बचाने के
लिए समाजसेवियों व संस्थाओं ने प्रार्थना सभाओं के क्रम में स्थानीय बहाई आध्यात्मिक सभा बेला द्वारा ग्राम मनुआं पुरवा में  स्थानीय आध्यात्मिक सभा के सचिव घनश्याम सिंह की अध्यक्षता में आयोजित विशिष्ट पारिवारिक प्रार्थना सभा में संकट निवारण व आरोग्यदायी  प्रार्थनाएं की गईं,इस मौके पर स्थानीय आध्यात्मिक सभा के सचिव,पत्रकार व त्रिभाषी साहित्यकार घनश्याम सिंह ने कोरोना निवारण के लिए स्वरचित अंग्रेजी प्रार्थना का पारिवारिक सदस्यों प्रमिला सिंह,कु.आँचल,शुभम बाबू,आशीष कमल आदि की उपस्थिति में  विश्व वासियों का आवाहन कर सस्वर पाठ किया गया,जिसको सार्वजनिक रूप से सोशल नेटवर्किंग साइट्स द्वारा देश व  विदेश में प्रसारित भी किया गया,

      इसी तरह प्राथमिक विद्यालय पुरवा हृदय में कार्यरत शिक्षिका उपासना राजपूत के ग्राम निवादा स्थित आवास पर आयोजित प्रार्थना सभा में शिक्षक 
उदय कुमार सिंह, सत्यम, आराधना सिंह राजपूत, सुशीला देवी, सरबती देवी आदि परिजनों ने कोरोना से रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की,इसी तरह कस्बा बेला के युवा समाजसेवी अवनीश शुक्ला ने शंखनाद कर ईश्वर से कोरोना के कहर से बचाने की प्रार्थना की।।
फ़ोटो 2 ग्राम मनुआं पुरवा व निवादा में आयोजित पारिवारिक प्रार्थना सभाएं
*"कोरोना" निवारण के लिए की गई अंग्रेजी प्रार्थना का हिंदी रूपांतरण*
हे सम्पूर्ण सृष्टि के रचयिता!
परमपिता परमात्मा!
जय हो,जय हो तेरी!
तूने अपने परम पावन कर 'कमल' से सम्पूर्ण सृष्टि व सर्वाधिक प्रिय मानव योनि का सृजन किया है किंतु महा खेद! तेरी ओर विमुख होने व अपने कर्मफल के कारण मानव योनि 'कोरोना' जैसी व्याधियों,बीमारियों का शिकार होकर आज तीव्र गति से विनाश की ओर जा रही है,मैं तुझसे याचना करता हूँ कि तू इन्हें क्षमा कर,ये तेरे अबोध शिशु हैं,तू क्षमाशील है, तू उदार है,तू ही एक मात्र इनका मार्गदर्शक व रक्षक है क्योंकि तू ही इनका एक मात्र निर्माता है।।
  --घनश्याम सिंह
        सचिव 
   स्थानीय बहाई आध्यात्मिक सभा
   बेला(औरैया)
निज निवास:ग्राम मनुआं
पो.बेला (औरैया)उप्र/भारत

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