भारतीय_संविधान_को_साक्षी_मानकर_रचाई_शादी, पेश की नई मिशाल- कल्पना प्रदीप
रिपोर्ट:- सौरभ त्यागी
स्थान:- जालौन उत्तर प्रदेश
जालौन में अनोखी शादी देखने को मिली । यहाँ एक कार्यकर्ता(दलित एक्टिविस्ट) है जो बुंदेलखंड जैसे अति पिछड़े क्षेत्र में दलितों,पिछड़ों,वंचितों व महिलाओं के हक़ अधिकार व सम्मान के लिये बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन व दलित मानवाधिकार के लिए संघर्षरत
उनकी बहन – कल्पना व उनके जीवन साथी प्रदीप ने भारतीय संविधान को साक्षी मानकर बौद्ध रीति रिवाज से शादी कर एक अनूठी मिशाल पेश की है जिसकी पूरे क्षेत्र व प्रदेश में चारों और चर्चा हो रही है, इस नव दम्पति से जब यह प्रश्न पूछा गया की उन्होंने भारतीय संविधान को साक्षी मानकर शादी क्यों की? तो उन्होंने बताया की भारतीय संविधान की बदौलत ही हमें हमारे सारे अधिकार मिलते है, विवाह करने की अनुमति यानि की विवाह अधिनियम भी भारतीय संविधान से ही मिलता है ! भारतीय संविधान हमारे लिए सर्वोपरि है, इसलिए हम लोगों ने भारतीय संविधान को साक्षी मानकर शादी की है !
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