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ऐसी होगी पहले चरण की जनगणना और NPR के लिए दिखाने होंगे ये दस्तावेज

ऐसी होगी पहले चरण की जनगणना और NPR के लिए दिखाने होंगे ये दस्तावेज

उत्तरप्रदेश नेवस21

जल्द ही देश भर में नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (National Population Register) की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. केंद्र सरकार (Central Government) ने इसे लेकर फिर से अधिसूचना जारी कर दी है. जनगणना 2021 (Census 2021) शुरू होने के बाद पहले चरण में हाउसहोल्ड यानी घरों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक के बीच में किया जाएगा जिसका नाम हाउसहोल्ड लिस्टिंग है. सेंसस के पहले चरण में सिर्फ हाउसहोल्ड ही होंगे न कि व्यक्तिगत जानकारी. इसमें घर का मुखिया कौन है, घर में कौन-कौन सी सुविधा है, कितने लोग हैं, ऐसे सवाल होंगे.


दूसरा चरण 2021 फरवरी में शुरू होगा जिसमें व्यक्तिगत सवाल होंगे, पहले चरण में घर में कितने लोग रह रहे हैं, ये जानकारी ली जाएगी ताकि ये पता चल सके कि गणना करने वाला शख्स कितनी जनसंख्या कवर कर रहा है.

2021 जनगणना में दूरदराज और कठिन इलाकों में सरकारी नुमाइंदे हेलीकाप्टर से भी जाएंगे. हालांकि पिछली बार 2011 के सेंसस में भी इसका इस्तेमाल हुआ था, लेकिन इस बार विस्तृत तरीके से इसका इस्तेमाल होगा. हाउसलिस्टिंग प्रक्रिया जो कि सेंसस के पहले चरण की है उसमें 31 शीर्षकों के अंतर्गत 34 सवाल होंगे. जनगणना में पूछे जाने वाले नए सवाल
घर में इंटरनेट है या नहीं. मेल- फीमेल या ट्रांसजेंडर, घर का मुखिया कौन है, सोर्स ऑफ ड्रिंकिंग वॉटर पैकेज या सप्लाई वॉटर, घर में मौजूद शौचालय कंबाइन्ड हैं या सिर्फ इसी घर के लिए, घर के मालिक का कहीं और घर है या नहीं, किचन में एलपीजी कनेक्शन है या नहीं और मेन सोर्स ऑफ कुकिंग एनर्जी क्या है, रेडियो या टीवी किस डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है. मोबाइल या किसी और पर, टीवी डीटीएच या किससे कनेक्टेड है, बैंक अकाउंट के बारे में हर इंडिविजुअल से पूछा जाएगा, घर में मोबाइल नंबर देना चाहें तो घर के लोग दे सकते हैं.

डिजिटल होगी जनगणनाइस बार पहली बार डिजिटल जनगणना (Digital Census) होगी जिसमें गणना के अधिकारी मोबाइल के जरिए डेटा ले सकेंगे. सेंसस के लिए विशेष 2020 ऐप अधिकारियों के पास होगा जिसका वो इस्तेमाल करेंगे. यह खास ऐप सरकार ने विकसित किया है जो गणना अधिकारियों को अपने मोबाइल पर डाउनलोड करना होगा. हालांकि जनगणना अधिकारी लोगों से कागज पर भी जानकारी ले सकेंगे. इस विस्तृत प्रक्रिया के लिए सरकार ने एक गहन ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया है.

चार फेज में ट्रेनिंग होगी नेशनल ट्रेनर, मास्टर ट्रेनर, फील्ड ट्रेनर और इन्यूमिनेटर इन चार स्तर पर गणना अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी जिसमें नेशनल ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है. पहले चरण में 30 लाख कर्मचारी इस काम को करेंगे, पिछली बार एनपीआर (NPR) को छोड़कर गणना अधिकारी को 5,500 रुपये मिले थे. इस बार गणना करने वाला अधिकारी हाउसलिस्टिंग, सेंसस का काम और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का काम करेंगे तो उन्हें 25000 रुपये मिलेंगे.

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर की प्रक्रिया भी 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक चलेगी. पश्चिम बंगाल और केरल ने नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर न लागू करने की बात राज्य में अधिकारिक स्तर पर कही है और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को इसकी जानकारी मिली है, बाकी सारे राज्यों ने नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर की प्रक्रिया को नोटिफाई कर दिया है. एनपीआर में कोई बायोमेट्रिक नहीं मांगा जा रहा है, कोई सबूत नहीं मांगा जाएगा.

एनपीआर में गणना अधिकारी आधार नंबर, मोबाइल नंबर, पैन कार्ड नंबर, डीएल नंबर यदि हाउसहोल्ड के पास है तो मांगेंगे, सिर्फ जानकारी मांगी जाएगी, कागज नहीं मांगे जाएंगे. सेंसस और एनपीआर पहले चरण के फॉर्म में हाउसहोल्ड को ये बताना होगा कि जो जानकारी उन्होंने दी है वो सही होगी.

इस बार होंगे ये नए सवाल
इस बार एनपीआर में ये नए सवाल शामिल किए जाएंगे मातृभाषा क्या है, पिछली बार हाउसहोल्ड का मालिक कहां रह रहे थे, जन्म स्थान की जगह, अभिभावकों की जानकारी. इस बाबत तो सरकार ने 73 जिलों से जानकारी जुटाई है जिसके बाद सेंसस और एनपीआर के फॉर्म को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

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